
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को पदभार संभालने के साथ ही राजनीति में इंट्री कल रही है। प्रियंका ने कार्यभार संभालने के बाद दो मुस्लिम नेताओं से पार्टी दफ्तर में मुलाकात की और फिर उसके बाद उन्होंने अपने घर पर कभी मायावती के खास रहे और अब कांग्रेस के नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी से मुलाकात की। प्रियंका की मुस्लिम नेताओं से मिलने एक रणनीति के तौर देखा जा रहा है।
कांग्रेस महासचिव के पद संभालने के साथ ही प्रियंका ने सबसे पहले कांग्रेस के कार्यकर्ता सलमान और सुल्तान से मुलाकात कर उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हालत का जाएजा लिया। असल में सुल्तान के पिता अतहर खान मायावती की पार्टी बसपा के पुराने नेता रहे हैं। सुल्तान अहमद खान 24 जनवरी को ही अपने पिता अतहर खान के साथ कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए हैं। अतहर खान बसपा के पुराने नेता रहे हैं और करीबी 32 साल बसपा में रहने के बाद अतहर खान ने 12 मई 2017 को पार्टी बीएसपी छोड़ दी थी। वह बसपा के उत्तराखंड, झारखंड, गुजरात, दिल्ली के प्रभारी भी रहे हैं बसपा ने अतहर खान को एमएलसी बनाया गया था।
जबकि सुल्तान अहमद खान को बहराइच की माटेरा विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं। प्रियंका ने कई सवाल इन दोनों से पूछे। लेकिन इन के सवालों के जबाव नहीं दिए। सलमान एएमयू से पढ़े हैं और कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। इसके बाद प्रियंका ने बाद में मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी से मुलाकात की। नसीमुउद्दीन सिद्दीकी को बसपा प्रमुख मायावती का करीबी माना जाता था और बाद में मायावती ने पार्टी से निकाल दिया। जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी बुंदेलखंड से आते हैं और यहां पर कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों को साधने का जिम्मा उन्हें सौंपा है। आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी महासचिवों और राज्य प्रभारियों की बैठक बुलाई है और इसमें प्रियंका भी शामिल होंगी।
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इसके बाद प्रियंका 10 फरवरी को प्रयागराज में चल रहे कुंभ में स्नान भी कर सकती है। जबकि लखनऊ में 11 फरवरी को रोड शो कर सकती हैं। कांग्रेस दफ्तर से निकलने के बाद प्रियंका गांधी ने अपने घर पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी सहित कई कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की। इससे पहले प्रियंका ने सलमान और सुलेमान से मुलाकात की। ये दोनों युवा नेता कांग्रेस में शामिल हुए हैं। सच्चाई ये भी है कि कांग्रेस पिछले दो साल से हिंदू राजनीति को धार देने में जुटी है। वहीं प्रियंका का सबसे पहले मुस्लिम नेताओं से मिलना, ये जाहिर करता है कि कांग्रेस हिंदू मुस्लिम दोनों को साध कर आगामी लोकसभा चुनाव में उतारना चाहती है।
राहुल गांधी ने गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हिंदू राजनीति शुरू की थी। राहुल गांधी ने एंटोनी कमेटी की रिपोर्ट के बाद हिंदू राजनीति को पार्टी में शुरू किया था। इसके बाद कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी कांग्रेस ने हिंदू और मंदिर राजनीति खेली। जिसका फायदा कांग्रेस को हुआ। अगर यूपी में 2014 के आंकड़ों को देखें तो यूपी में कांग्रेस को 11 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे जबकि सपा को पचास फीसदी से ज्यादा वोट मिले।
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