रणदीप सुरजेवाला का 14 साल बाद कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ छलका दर्द, खोला बड़ा राज

Published : Oct 17, 2019, 05:59 PM ISTUpdated : Oct 17, 2019, 07:25 PM IST
रणदीप सुरजेवाला का 14 साल बाद कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ छलका दर्द,  खोला बड़ा राज

सार

असल में सुरजेवाला ने हुड्डा को लेकर नाराजगी जताई है। क्योंकि पिछले एक महीने के दौरान जिस तरह से कांग्रेस नेतृत्व और सोनिया गांधी ने हुड्डा को तवज्जो दी है। उसको देखकर लगता है कि अगर राज्य में कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है तो हुड्डा को ही पार्टी सीएम बनाएगी। लिहाजा सुरजेवाला ने पार्टी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर अपनी दावेदारी ठोकी है। 

चंडीगढ़। कांग्रेस के नेता और राहुल गांधी के करीबी माने जानें वाले रणदीप सुरजेवाला का आज दर्द कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ छलक गया। उन्होंने कहा कि 2005 के चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया था। लेकिन इसके बाद पार्टी ने भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जबकि वह राज्य में पार्टी के कार्यकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हुआ करते थे। सुरजेवाला राज्य में हो रहे चुनाव में कैथल से पार्टी के उम्मीदवार हैं।

असल में सुरजेवाला ने हुड्डा को लेकर नाराजगी जताई है। क्योंकि पिछले एक महीने के दौरान जिस तरह से कांग्रेस नेतृत्व और सोनिया गांधी ने हुड्डा को तवज्जो दी है। उसको देखकर लगता है कि अगर राज्य में कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है तो हुड्डा को ही पार्टी सीएम बनाएगी। लिहाजा सुरजेवाला ने पार्टी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर अपनी दावेदारी ठोकी है।

सुरजेवाला ने इस बात का खुलासा किया कि 2005 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कांग्रेस ने उन्हें और भजनलाल को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया था, लेकिन इन दोनों की दावेदारी को दरकिनार कर पार्टी ने मुख्यमंत्री हुड्डा को बनाया। फिलहाल सुरजेवाला के इस बयान से पार्टी में गुटबाजी बढ़ गई है। क्योंकि राज्य में पहले से ही कई गुट हैं। जिन पर हुड्डा अभी तक भारी पड़ते आए हैं।

हुड्डा के कारण ही पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर को पार्टी से बाहर कर दिया गया है। फिलहाल सुरजेवाला कैथल से पार्टी के उम्मीदवार हैं। वह राज्य में हुए 2009 और 2014 का चुनाव जीत चुके हैं। इस सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के लीला राम से है। जो कभी आईएनएलडी में हुआ करते थे।

हालांकि इस साल जींद में हुए उप चुनाव में सुरजेवाला को करारी हार का सामना करना पड़ा था। उस वक्त भाजपा ने कांग्रेस पर तंज कसा था कि पार्टी ने एक मौजूदा विधायक को हारने के लिए विधायकी का टिकट दिया है।

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