
सबरीमला मंदिर के विवादों के चलते केरल विधानसभा को दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। विपक्ष ने सदन में धारा 144 को वापस लेने के लिए विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों के विधायकों ने सदन के अध्यक्ष की बेंच के पास जमकर नारे बाजी की और विरोध प्रदर्शन किया।
स्पीकर के मना करने के बाद भी विपक्षी दल के नेताओं ने प्रश्न सत्र के दौरान खूब नारे बाजी की और सत्र में बाधा डाली। विरोध प्रदर्शन के कारण सत्र को वहीं पर स्थगित कर दिया गया। सदन की बैठक केवल 23 मिनट की ही थी। जिसके बाद केरल विधानसभा के अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन ने सदन को स्थगित कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक विपक्षी के नेता रमेश चेनिथला ने स्पीकर श्रीरामकृष्णन से मुलाकात की और कहा कि विपक्षी विधायकों की हड़ताल समाप्त करने के लिए सरकार को सबरीमाला से निषेध आदेश वापस लेना पडेगा।
इस मामले के तहत स्पीकर ने विपक्ष को किसी भी तरह का आश्वासन नहीं दिया, इसलिए विधानसभा में 10 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया गया।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि यूडीएफ के तीन नेताओं ने धारा 144 को वापस लेने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की है। 27 नवंबर को यूडीएफ ने घोषणा की है, कि वे धारा 144 को हटाए जाने तक विधानसभा के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।
विधायक पीसी जॉर्ज और ओ राजगोपाल भी विधानसभा से बाहर चले गए। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने भाजपा नेता एएन राधाकृष्णन के अनिश्चितकालीन उपवास को समाप्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
जिला कलेक्टर पीबी नोह ने शनिवार को 12 दिसंबर की आधी रात तक सबरीमाला और उसके आस पास के क्षेत्रों में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेध आदेशों को बढा दिया है।
धारा 144 का अर्थ किसी भी क्षेत्र में चार या उसे अधिक लोगों को इकट्ठा करने पर रोक लगाना है। केरल के निलाक्कल, एलुवंकल, सनिधानम, पंबा और सबरीमाला में धारा 144 को लागू कर दिया गया है।
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