
लोकपाल की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस. के. कौल की पीठ ने कहा था कि हलफनामे में आपको लोकपाल खोज समिति गठित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी अगली सुनवाई से पहले हलफनामे के जरिये सुनिश्चित करें।
ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया था उसमें लोकपाल की नियुक्ति की समय सीमा नही बताई गई थी। सरकार ने कहा था कि लोकपाल के चयन के लिए पहले सर्च कमेटी बनानी होगी।
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव ने हलफनामा दायर कर कहा था कि चयन समिति को एक साथ सदस्यीय सर्च कमेटी मनोनयन करना होगा। सर्च कमेटी के गठन के बाद वो अपनी प्रक्रिया तय करेगी।
उसके बाद चयन समिति एक तय समय सीमा में लोकपाल के लिए उम्मीदवारों के नाम की अनुशंसा करनी होगी।
हलफनामे में यह भी कहा गया था कि चूंकि अभी सर्च कमेटी का गठन नहीं हुआ है। इसलिए लोकपाल की नियुक्ति के लिए समय सीमा बताना मुश्किल है।
इस बीच एडवोकेट प्रशांत भूषण ने जब लोकपाल चयन समिति के कामकाज में पारदर्शिता पर सवाल उठाया
तो मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि 'मिस्टर भूषण, हर बात को नकारात्मक रुप से नहीं देखना चाहिए।चीजों को सकारात्मक रुप से देखना शुरू कीजिए, दुनिया खूबसूरत लगने लगेगी'।
लोकपाल की नियुक्ति होने के बाद उसे भ्रष्टाचार के मामले में प्रधानमंत्री से लेकर छोटे मंत्री तक पर सुनवाई करने का अधिकार होगा।
लोकपाल के पास विशिष्ट शक्तियां होगी जिसमें माध्यम से वह सेना को छोड़कर किसी के भी खिलाफ कार्रवाई कर सकेगा।
लोकपाल भ्रष्टाचारियों की संपत्ति भी कुर्क भी कर सकता है। साल 2013 में अन्ना आंदोलन के बाद देश मे यह कानून बना। हालांकि अभी तक एक भी लोकपाल की नियुक्ति नही हुई है।
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