
मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद राज्य की सत्ता में बदलाव की अटकलों के बीच राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ का खुफिया महकमा सरकारी गतिविधियों के बजाए विधायकों पर खुफिया नजर लगाए हुए है। कमलनाथ को डर है कि बीजेपी कांग्रेस के विधायकों को तोड़ सकती है। यही नहीं इंटेलिजेंस के अफसर उन नेताओं पर भी नजर रख रहे हैं, जिनके बीजेपी नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं।
कमलनाथ के डर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि वह ज्यादा से ज्यादा समय अपने कार्यालय में ही समय बिता रहे हैं। उनके संपर्क में राज्य के इंटेलिजेंस के अफसर हैं। जो उन्हें विधायकों के पूरी गतिविधियों की जानकारी दे रहे हैं। कमलनाथ सरकार के खिलाफ बयान देने वाले कांग्रेस विधायकों पर भी इंटेलीजेंस की कड़ी नजर है।
विधायकों से मिलने वाले नेताओं के साथ ही अफसरों की गतिविधियां रडार पर हैं। क्योंकि कमलनाथ को डर है कि बीजेपी कभी भी उसके और निर्दलीय विधायकों को तोड़ सकती है। कमलनाथ पहले ही कह चुके हैं कि बीजेपी उनकी सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। हालांकि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कह चुके हैं कि बीजेपी इस तरह के प्रयास नहीं करेगी।
लोकसभा चुनाव के बाद राज्य की सियासत गरमाई हुई है। राज्य के सीएम कमलनाथ को लगता है कि बीजेपी विधायकों की 'हॉर्स ट्रेडिंग' कर सकती है। लोकसभा चुनावों में मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से बीजेपी ने 28 सीटों पर कब्जा जमाया है। कांग्रेस सिर्फ 1 सीट जीत पाई।
असल में कमलनाथ का डर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी बढ़ा दिया है। क्योंकि कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि राज्य में कमलनाथ सरकार महज 20-22 दिन ही चलेगी। वहीं कुछ दिन पहले कमलनाथ सरकार की मंत्री इमरती देवी भी उनके खिलाफ बयान दे चुकी है। वहीं निर्दलीय विधायक पिछले छह महीनों से अपना नाराजगी जता रहे हैं।
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