
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से विजिलेंस रिपोर्ट को सुरक्षित करने के लिए कहा है। कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका को भी खारिज कर दिया है जिसमें खुद को पक्षकार बनाने की मांग की थी।
अब सेशंस कोर्ट यानि स्पेशल जज अरुण भारद्वाज इस मामले की सुनवाई करेंगे। पुलिस को संबंधित दस्तावेज सौपने के लिए अंतिम मौका दिया गया है।
बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अर्जी लगाई थी कि उन्हें इस केस में सरकारी वकील की मदद करने और तथ्यों की जानकारी देने के लिए केस से जोड़ा जाए।
स्वामी ने अर्जी दायर करके यह प्रस्ताव दिया था कि उन्हें इस केस में सरकारी वकील की मदद करने की अनुमति दी जाए। लेकिन इसका विरोध करते हुए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट से कहा था कि इस केस में केवल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ही कोर्ट को असिस्टेंस दे सकता है।
साथ कहा गया कि विक्टिम सिर्फ कोर्ट में अपील दायर कर सकता है, लेकिन पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ही मामले में बहस करेंगे। पुलिस ने भी कहा था कि इस मामले में बाहर का वकील कैसे बहस कर सकता है।
स्वामी की यह भी दलील थी कि वो इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे और जनहित याचिका दायर की थी। लेकिन सच्चाई तो यह है कि दिल्ली हाइकोर्ट ने इसी मामले में स्वामी की जनहित याचिका को खारिज कर दिया था और अपने फैसले में कहा था यह जनहित याचिका जनहित में नही है बल्कि पॉलिटिकल इन्ट्रेस्ट लिटिगेशन दायर की गई है।
गौरतलब है कि सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत पाई गई थी। केस की एफआईआर जनवरी 2015 में दर्ज की गई थी।
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