
सारदा चिटफंड मामले में कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को सुप्रीम कोर्ट से नही मिली राहत। कोर्ट ने राजीव कुमार की याचिका को खारिज किया। कोर्ट ने कहा यह याचिका सुनवाई योग्य नही है। अदालत ने कहा यह मांग सुनवाई योग्य नहीं है। पश्चिम बंगाल में सभी कोर्ट चल रही हैं, आप हाईकोर्ट या निचली अदालत जाइये। हम अपना समय नहीं बर्बाद करेंगे जबकि हमने ही पहले आदेश दिया था।
राजीव कुमार ने कहा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट में वकीलों की हड़ताल की वजह से उनकी याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पा रही है इसलिए उनकी हिरासत पर लगी रोक अवधि बढ़ाई जाए। सीबीआई उन्हें संरक्षण खत्म होने के बाद हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। आपकी मांग पहले ही सीजेआई खारिज कर चुके हैं। आप क्या चाहते हैं हम कोई कड़ी टिप्पणी करें। यह फैसला न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन खंडपीठ ने दिया है।
राजीव कुमार ने अपनी अर्जी में संरक्षण की अवधि बढ़ाने की मांग की थी। क्योंकि राजीव कुमार की सुप्रीम कोर्ट से मिली संरक्षण की अवधि 24 मई को खत्म हो रही है। राजीव कुमार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उन्हें झूठे आरोपों के तहत सीबीआई द्वारा फंसाया जा रहा है।
इससे पहले भी राजीव कुमार ने 7 दिन की मोहलत की अवधि को बढ़ाने की मांग की थी। जिसे कोर्ट ने इनकार कर दिया था। राजीव कुमार ने पश्चिम बंगाल में वकीलों की हड़ताल के चलते मोहलत की अपील की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटा दिया था। साथ कोर्ट ने सीबीआई से 7 दिन तक राजीव कुमार को गिरफ्तार ना करने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि राजीव कुमार चाहे तो इन 7 दिनों में अपनी जमानत की गुहार लगा सकते है। लेकिन कोलकाता में वकीलों की हड़ताल के चलते वे जमानत की गुहार नही लगा पा रहे है। गौरतलब है कि राजीव कुमार पर यह आरोप है कि उन्होंने सारदा चिटफंड मामले में सबूतों को नष्ट करने में अहम भूमिका निभाई थी। कोर्ट ने यह फैसला उनसे पूछताछ के लिए दायर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करने हुए दिया।
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