
इसके अलावा कोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण की उस मांग को ठुकरा दिया है। जिसमे सर्च कमिटी की तरफ से सौंपे गए नामों को सार्वजनिक करने की मांग की थी। लोकपाल के न्यायिक और गैर न्यायिक सदस्यों के लिए भी पैनल भेजा गया है। नियम के मुताबिक प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सेलेक्शन कमिटी इस पर फैसला लेगी।
बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान भी कोर्ट ने लोकपाल की सर्च कमेटी के सदस्यों की नियुक्ति के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए जवाब पर नाखुशी जताई थी। कोर्ट ने केंद्र को ओर से पेश अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने हलफनामा दायर कर कहा था कि चयन समिति की बैठक हुई थी। लेकिन सर्च कमेटी के लिए नामों पर अंतिम फैसला नही हुआ है। एजी ने यह भी कहा था कि ऐसी नियुक्ति के लिए कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए सर्च कमेटी के सदस्यों की नियुक्ति के लिए जल्दी ही बैठक होनी है।
ज्ञात हो कि एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि केंद्र सरकार ने अगली तारीख तय नही की है, और कानून पारित होने के पांच साल बाद भी वो लोकपाल की नियुक्ति में ताल मटोल कर रहे है। भूषण ने कहा कि या तो संभावित प्राधिकरण के खिलाफ अवमानना के कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए या फिर न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त अधिकार का प्रयोग कर लोकपाल की नियुक्ति कर सकता है।
शीर्ष अदालत इस मामले में कोर्ट के फैसले पर अमल नही होने के कारण सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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