इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला विदेश मंत्री रही सुषमा, महज 25 साल में बनीं हरियाणा में कैबिनेट मंत्री

Published : Aug 07, 2019, 01:04 AM IST
इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला विदेश मंत्री रही सुषमा, महज 25 साल में बनीं हरियाणा में कैबिनेट मंत्री

सार

सुषमा स्वराज ने अपने राजनीतिक करियर शुरूआत आपातकाल के दौरान की थी। हालांकि वह पेशे से वकील थी। लेकिन उन्होंने राजनीति में लंबी पारी खेली। वह पहली बार 1977 में हरियाणा से विधायक चुनी गईं। महज 25 वर्ष की उम्र में वह तत्कालीन राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी थी। वह 1977-1979 में हरियाणा में चौधरी देवी लाल की सरकार में श्रम मंत्री रही।

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज और सबसे प्रखर नेताओं में से एक पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल्ली के एम्स में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया है। उन्हें मंगलवार रात को ही एम्स में भर्ती गया गया था। लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सुषमा स्वराज के निधन पर हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर विपक्ष के सभी नेताओं ने सुषमा स्वराज के निधन पर दुख जताया है।

सुषमा स्वराज ने अपने राजनीतिक करियर शुरूआत आपातकाल के दौरान की थी। हालांकि वह पेशे से वकील थी। लेकिन उन्होंने राजनीति में लंबी पारी खेली। वह पहली बार 1977 में हरियाणा से विधायक चुनी गईं। महज 25 वर्ष की उम्र में वह तत्कालीन राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी थी। वह 1977-1979 में हरियाणा में चौधरी देवी लाल की सरकार में श्रम मंत्री रही। सबसे कम उम्र में मंत्री बनने का उनका उस वक्त का रिकार्ड है। 

सुषमा स्वराज पहली बार 1990 में सांसद बनीं और उसके बाद वह 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिनों की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री बनी थी। हालांकि इसे बाद उन्होंने दिल्ली की राज्य की राजनीति में उतारा गया और वह 1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी।

हालांकि भाजपा की यह सरकार ज्यादा दिनों तक न चल सकी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी से चुनावी रण में उतारा गया। लेकिन इस चुनाव में सुषमा को हार का सामना करना पड़ा था। फिर पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेजा और फिर वह 2000 में अटल बिहारी सरकार में फिर से सूचना प्रसारण मंत्री बनीं।

सुषमा स्वराज ने 2009 और 2014 में मध्यप्रदेश के विदिशा से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीतकर संसद पहुंची थी। वह 2009 से 2014 तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रही। उसके बाद 2014 में केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद उन्हें विदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

 वकील से शुरू हुआ राजनैतिक करियर

अंबाला में जन्मी सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1953 को हुआ था। वह राजनीति में आने से पहले सुप्रीम कोर्ट में वकील भी थीं। इसके बाद उन्होंने राजनीति में नई पारी की शुरूआत की और हरियाणा की देवीलाल सरकार में वह श्रम मंत्री बनीं।

सुषमा स्वराज को अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जर्नल ने 'बेस्ट लव्ड पॉलिटिशियन' की उपाधि भी दी थी। सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार प्राप्त करने वाली वह पहली और एकमात्र महिला सांसद थीं। उन्हें उनके बेहतर कार्यों के लिए 2008 और 2010 में यह पुरस्कार दिया गया।

घर से मिली थी राष्ट्रवाद की शिक्षा

सुषमा स्वराज का जन्म अविभाजित पंजाब की अंबाला छावनी में हुआ था। उनके पिता हरदेव शर्मा शर्मा कट्टर सनातनी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे। हालांकि उनका परिवार मूल रूप से पाकिस्तान के लाहौर का था, जो बंटवारे के बाद अंबाला आ गया था।

उनके घर में अक्सर राजनैतिक चर्चाएं हुआ करती थी। जिसका असर उनक पर पड़ा और बाद में उन्हें राजनीति में सेवा की। सुषमा ने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की थी।

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