
भुवनेश्वर। पिछले साल पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए कांस्टेबल मनोज कुमार बेहरा के माता पिता को उसकी पत्नी ने अकेले छोड़ दिया है। मृतक की पत्नी ने अपने ससुराल के लोगों को दयनीय स्थिति के लिए छोड़ दिया है। वहीं शहीद की पत्नी उसे राज्य और केन्द्र सरकार से मिले पैसे को भी अपने साथ लेकर चली गई है। हालांकि केन्द्र सरकार ने शहीद की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन बच्ची छोटी होने के कारण उसने सरकारी नौकरी के लिए मना कर दिया था।
पिछले साल जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 45 जवान शहीद हो गए थे। जिसमें मनोज कुमार बेहरा भी थे। लेकिन उनके शहीद हो जाने के बाद उनके परिवार में ही पारिवारिक जंग शुरू हो गई है। क्योंकि बेहरा की पत्नी ने सरकार से मिली धनराशि को अपने एकाउंट में ही रखा और अब वह घर छोड़कर चली गई है। जबकि बेहरा के माता पिता के पास महज वह ही एक आय का जरिया था। लेकिन बहू के इस व्यवहार के कारण वह फिर से गरीबी और दयनीय जिंदगी को जीने के लिए मजबूर हो गए हैं।
शहीद कांस्टेबल मनोज कुमार बेहरा कटक जिले के नियाली क्षेत्र के अंतर्गत रतनपुर गाँव के रहने वाले थे। शहीद मनोज के पिता ने एक मीडिया घराने से बात करते हुए कहा कि उनके बेटे की मृत्यु के बाद उनके परिवार की स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। क्योंकि उनकी बहू ने घर छोड़ दिया है और जो 51 लाख रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद केन्द्र और राज्य सरकार की तरफ से मिली थी।
उसे बहू अपने साथ लेकर चली गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार से 25 लाख रुपये और केंद्र सरकार से 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। हालांकि उनकी बहू को सरकार ने सरकारी नौकरी भी ऑफर की थी, लेकिन उसने बच्ची छोटे होने की बात कह कर नौकरी से मना कर दिया था।
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