
कोलकाता। विपक्षियों के चौतरफा हमले झेल रही बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीम ममता बनर्जी ने 'बांग्ला' कार्ड खेला है। ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में रहने वालों को बांग्ला भाषा बोलनी सीखनी होगी।
राज्य में डॉक्टरों की हड़ताल से हलकान ममता ने कहा कि बाहरी लोग राज्य में डॉक्टरों के आंदोलन को उकसा रहे हैं। ममता ने भाजपा पर बंगालियों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कांचरापाड़ा में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘बाहरी लोग डॉक्टरों को उकसा रहे हैं। मैंने सही कहा था कि वे कल के प्रदर्शन में शामिल थे। मैंने एसएसकेएम अस्पताल में कुछ बाहरियों को नारेबाजी करते हुए देखा।’
ममता ने आरोप लगाया कि हाल में हुए लोकसभा चुनावों में ईवीएम में ‘गड़बड़ी’ की गई थी। उन्होंने कहा कि चुनाव कराने के लिए मतपत्रों का इस्तेमाल होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘सिर्फ इसलिए कि भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी करके कुछ सीटें जीत गई, इसका मतलब यह नहीं कि वे बंगालियों और अल्पसंख्यकों को पीट सकते हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’
उन्होंने कहा, ‘पुलिस हंगामा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। अगर कोई बंगाल में रह रहा है तो उसे बांग्ला सीखनी पड़ेगी।’
दरअसल, पश्चिम बंगाल में हड़ताली डॉक्टरों ने अपनी आंदोलन वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बिना शर्त माफी मांगे जाने के अलावा छह और शर्तें रखी। वहीं आंदोलनकारी डॉक्टरों के समर्थन में बंगाल के कई प्रबुद्ध लोग भी आ गए हैं। उन्होंने ममता बनर्जी से गतिरोध का समाधान निकालने का अनुरोध किया है।
फिल्मकार अपर्णा सेन, कलाकार कौशिक सेन, संगीतकार देवज्योति मिश्रा समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक हड़ताली डॉक्टरों से मिलने एनआरएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल गए। सेन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हड़ताली डॉक्टरों से मुलाकात करने और उनकी शिकायतों पर ध्यान देने को कहा है।
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