आईबी ने चेताया, चुनाव, त्यौहारों के दौरान सोशल मीडिया से माहौल बिगाड़ सकते हैं असामाजिक तत्व

By ankur sharmaFirst Published Oct 28, 2018, 5:37 PM IST
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खुफिया ब्यूरो के मुताबिक, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सांप्रदायिक घटनाएं ज्यादा बढ़ी हैं। दोनों राज्यों में चुनाव भी होने वाला है। ऐसे में ये राज्य आसान निशाना हो सकते हैं। 

पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव और आगामी त्यौहारी सीजन में सोशल मीडिया एक बड़ा खतरे का जरिया बन सकता है। इससे किसी संभावित आतंकी हमले से ज्यादा बड़ा नुकसान हो सकता है।  

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के मुताबिक, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सांप्रदायिक घटनाएं ज्यादा बढ़ी हैं। दोनों राज्यों में चुनाव भी होने वाला है। ऐसे में ये राज्य आसान निशाना हो सकते हैं। 

आईबी ने अपने पत्र में कहा है, 'त्योहार के दौरान साइबर जगत के दुरुपयोग पर कड़ी निगरानी रखने जाने की जरूरत है। शरारती तत्व भड़काने वाली सामग्री पोस्ट कर धार्मिक उन्माद को हवा दे सकते हैं। निर्धारित मानदंडों के अनुसार इस तरह की सामग्री को तुरंत ब्लॉक कर स्थिति संभाली जा सकती है।'

देश भर की कानूनी एजेंसियों को आईबी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है, 'कुछ राज्यों विशेषकर राजस्थान में होने वाले चुनावों के मद्देनजर घृणा फैलाने वाले तत्वों पर कड़ी निगरानी रखे जाने की जरूरत है। हाल के महीनों में राजस्थान में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में इजाफा हुआ है।'

खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान से भेजे गए संदेशों को पकड़ा है। इनसे चुनावी समर वाले राज्यों में कानून-व्यवस्था से संबंधित बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। त्यौहार के सीजन में सांप्रदायिक हिंसा को फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेशों को फैलाया जा रहा है। 

कई ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं जिनमें पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन स्थानीय स्लीपर सेल से संपर्क साधते हैं और सोशल मीडिया के जरिये जमीन पर हिंसा फैलाने का काम करते हैं। 

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में इस नए खतरे से आगाह किया था। उन्होंने हैदराबाद में कहा था, 'आतंकी किसी देश को ही नहीं बल्कि समूचा मानवता के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। आज आतंकवाद नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। आपने देखा होगा कि आतंकवाद लगातार अपना चेहरा बदल रहा है, जहां बर्बर और क्रूर कृत्यों में शामिल आतंकी  अपने सोशल मीडिया नेटवर्क को एक प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इनके जरिये संपर्क, समन्वय साधा जाता है। साथ ही अपनी विचारधारा को फैलाने में मदद मिलती है।'

आईबी ने अपने एजेंटों को जमीनी रिपोर्ट जुटाने को कहा है, क्योंकि त्यौहारी सीजन  और चुनावी मौसम में सोशल मीडिया पर फैलाई गई कोई भी सामग्री कानून-व्यवस्था के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। 

ब्यूरो के मुताबिक, 'जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को खराब करने वाली कोई भी सूचना मिलने पर उसे तुरंत राज्य पुलिस के अधिकारियों के साथ साझा किया जाए।'
 

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