
नई दिल्ली: दलाई लामा के निजी सचिव तेनजिन तकलाह ने बताया कि अस्पताल में सीने में इंफेक्शन का इलाज चल रहा है और अगले कुछ दिनों तक उन्हें निगरानी में रखा जाएगा.
गौरतलब है कि धार्मिक गुरू 7 अप्रैल को नई दिल्ली में युवा सम्मेलन में शामिल हुए थे और अगले दिन ही दिल्ली से धर्मशाला पहुंचे थे. सीने में जलन की शिकायत के बाद एहतियात के लिए उन्हें दिल्ली में इलाज के लिए लाया गया है.
चीन द्वारा 1950 में तिब्बत पर कब्जे के बाद दलाई लामा 1959 में चीन द्वारा तिब्बतियों के बढ़ते दमन के चलते भारत चले आए थे. तब से ही वह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार का संचालन कर रहे हैं.
बीते दशकों के दौरान भारत में शरण पाए लगभग एक लाख से ज्यादा तिब्बतियों का मानना है कि दलाई लामा उनके स्वतंत्र तिब्बत के सपने की आखिरी कड़ी हैं.
हालांकि हाल ही में दलाई लामा ने इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी को बताया था कि उनकी मृत्यु के बाद उनका पुनर्जन्म भारत में ही पाया जा सकता है. दलाई लामा ने यह भी चेतावनी जारी की थी कि उनकी मृत्यु के बाद चीन द्वारा नया लामा चिन्हित करने की कोशिश की जाएगी लेकिन उसका सम्मान तिब्बत के लोग नहीं करेंगे.
गौरतलब है कि चीन सरकार ने तिब्बत पर कब्जा जमाने के बाद नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा को एक खतरनाक अलगाववादी की संज्ञा दी थी. इसके साथ ही चीन का दावा है कि दलाई लामा के बाद नया लामा चुनने का अधिकार चीन की सरकार के पास है क्योंकि परंपरा के मुताबिक चीन का सम्राट ही नया लामा चिन्हित करता है.
लेकिन तिब्बतियों के विश्वास के मुताबिक एक वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु की मृत्यु के बाद पुनर्जन्म के लिए उसकी आत्मा एक बच्चे में आ जाती है. तिब्बत परंपरा में हजारों वर्षों से धर्मगुरु चुनने की यही व्यवस्था रही है. ऐसे में चीन से निर्वासित तिब्बतियों का मानना है कि चीन सरकार तिब्बत पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए और अपने हित को साधने के लिए लामा की पहचान करने की कवायद करेगी.
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