यूपी के गाजीपुर के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाला माफिया डान मुख्तार अंसारी पहले अचूक निशानेबाज के रूप में पहचाना जाता था। मामूली ठेकेदारी से अपने कॅरियर की शुरूआत की। मोटरसाइकिल से मुहम्मदाबाद और गाजीपुर के बीच में काम देखना शुरू किया।
लखनऊ। यूपी के गाजीपुर के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाला माफिया डान मुख्तार अंसारी पहले अचूक निशानेबाज के रूप में पहचाना जाता था। मामूली ठेकेदारी से अपने कॅरियर की शुरूआत की। मोटरसाइकिल से मुहम्मदाबाद और गाजीपुर के बीच में काम देखना शुरू किया। मुख्तार के खिलाफ साल 1988 में पहली बार मर्डर का केस दर्ज हुआ। पुलिस डायरी के मुताबिक, मुख्तार अंसारी से जुड़े लोगों के पास कई तरह की विदेशी राइफलें और कीमती असलहे मौजूद थे।
प्वाइंट में जाने कैसे बढ़ा माफिया मुख्तार अंसारी का ग्राफ
साल 1991 में कल्याण सिंह सरकार के कार्यकाल में कोयला व्यापारी नंद प्रकाश रूंगटा का अपहरण।
पंजाब और हरियाणा में फरारी काटने के दौरान जुटाया असलहों का जखीरा।
1994 में गाजीपुर उपचुनाव लड़ा और हार गए। उस दौरान जेल में थे।
1995 में मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी सपा में शामिल हुए तो बढ़ा सियासी कद।
किडनैपिंग, मर्डर, जबरन वसूली के मामलों में सरकारों का अभयदान।
वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर समेत दर्जन भर जिलों में फैला आर्थिक और आपराधिक साम्राज्य।
माया और मुलायम सरकारों का बेहद खास रहा।
एक समय तो बसपा और सपा ने उसे अपने पाले में करने की काफी कोशिश भी की।
1996 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे।
2002, 2007, 2012 और 2017 में मऊ से जीत मिली। 3 चुनाव जेल में रहते हुए लड़ें।
राजनीतिक दुश्मनी से मुख्तार अंसारी लाइमलाइट में आया।
गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर बीजेपी नेता कृष्णानंद राय ने 2002 में अफजाल अंसारी को हराया।
यह सीट अंसारी परिवार के पास 1985 से रही। यही बात मुख्तार अंसारी को अखर गई।
मुख्तार अंसारी को लगा कि उसका वर्चस्व टूटा। यह पचाना उसके लिए मुश्किल था।
2005 में कृष्णानंद राय की हत्या उस समय हो गई। जब वह एक कार्यक्रम से लौट रहे थे।
इस केस के बाद मुख्तार अंसारी जरायम की दुनिया में चर्चा में आया।
कौन था माफिया मुख्तार अंसारी?
गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में 3 जून 1963 में जन्मे माफिया मुख्तार अंसारी का परिवार एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार है। मुख्तार के दादा डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे। कांग्रेस के साल 1926-27 में अध्यक्ष भी रहें। उनके नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान ने 1947 की लड़ाई में शहादत दी थी। उसके लिए उन्हें महावीर चक्र दिया गया था। मुख्तार के पिता सुबहानउल्लाह अंसारी भी साफ छवि के नेता थे और गाजीपुर की राजनीति में सक्रिय रहे।
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