
राजस्थान का शिक्षा विभाग इन दिनों पशोपेश में है. पशोपेश इस बात का कि स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप का प्रताप पढाया जाए या अकबर की महानता का बखान किया जाए. सरकार इस बात को लेकर उलझ गयी है कि महान कौन था. मुगल शासक अकबर या फिर महाराणा प्रताप.
असल में प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही स्कूली शिक्षा का सिलेबस बदले जाने की सुगबुगाहट शुरु हो गई है. शिक्षा मंत्री गोविंद सिह डोटासरा कुछ समय पिछली सरकार के समय में शामिल किए गए महाराणा प्रताप के पाठ पर दिए बयान से सुर्खियों में आए थे. डोटासरा ने पिछली सरकार द्रारा स्कूलो में महाराणा प्रताप के पाठ को जोड़े जाने और अकबर के पाठ को हटाए जाने पर समीक्षा किए जाने की जरुरत बताई है. इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि राज्य में जल्द ही स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा. अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए महाराणा प्रताप और अकबर का मुद्दा मुसीबत बना हुआ है. क्योंकि राज्य में सरकार बदल गयी है और अब अकबर को महान बताने का दबाव ऊपर से पड़ने लगा है.
बताया जा रहा है कि इस संदर्भ में अब शिक्षा विभाग की ओर से भाजपा की सरकार में पाठ्यक्रम में किए गए बदलाव का विवरण खंगालने के साथ साथ स्कूली पाठ्यक्रम की अन्य किताबें में हुए बदलाव को भी दिखावने में लगे है. पिछली भाजपा सरकार के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने महाराणा प्रताप को महान बताते हुए पाठ्यक्रम में कई बदलाव किए थे. पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए अकबर के आगे लगा महान शब्द को हटा दिया गया था. साथ ही महाराणा प्रताप के नाम के आगे महान शब्द लगाया गया था. इसके अलावा यह भी लिखा गया था कि हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर नहीं, बल्कि महराणा प्रताप जीते थे. अब सरकार बदली, तो राज्य के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कह दिया है कि पूरे पाठ्यक्रम की समीक्षा की जाएगी और यह देखा जाएगा कि महाराणा प्रताप और अकबर में कौन महान था.
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