गुजरात में किसे मिलेगा सोनिया का आर्शीवाद, कांग्रेस के भीतर शुरू हुई पॉवर पॉलिटिक्स

Published : Jun 07, 2020, 07:44 AM ISTUpdated : Jun 07, 2020, 09:10 AM IST
गुजरात में किसे मिलेगा सोनिया का आर्शीवाद, कांग्रेस के भीतर शुरू हुई पॉवर पॉलिटिक्स

सार

अभी तक आठ विधायक पार्टी को अलविदा कह चुके हैं।  जिसके बाद भाजपा की नजर तीसरी सीट पर है। वहीं कांग्रेस में दो प्रत्याशियों के बीच गुटबाजी शुरू हो गई है। क्योंकि दो प्रत्याशियों में से एक ही प्रत्याशी राज्यसभा की दहलीज पर पहुंच  सकता है। लेकिन अब  ये सवाल उठ रहा है कि प्रथम वरीयता के लिए पार्टी किसके पक्ष में आदेश जारी करेगी।

नई दिल्ली। गुजरात में कांग्रेस का राज्यसभा के लिए चुनावी गणित गड़बडा गया है। राज्य की कुल चार सीटों के लिए 19 जून को चुनाव होना है और इससे पहले अभी तक आठ विधायक पार्टी को अलविदा कह चुके हैं।  जिसके बाद भाजपा की नजर तीसरी सीट पर है। वहीं कांग्रेस में दो प्रत्याशियों के बीच गुटबाजी शुरू हो गई है। क्योंकि दो प्रत्याशियों में से एक ही प्रत्याशी राज्यसभा की दहलीज पर पहुंच  सकता है। लेकिन अब  ये सवाल उठ रहा है कि प्रथम वरीयता के लिए पार्टी किसके पक्ष में आदेश जारी करेगी।


कांग्रेस के आठ विधायकों के इस्तीफे देने के बाद कांग्रेस का पूरा गणित फेल हो गया है। राज्य में कांग्रेस ने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। राज्य में कांग्रेस ने भरत सिंह सोलंकी और शक्ति सिंह गोहिल को प्रत्याशी बनाया है। लेकिन विधायकों के पार्टी  छोड़ने के बाद अब एक ही प्रत्याशी राज्यसभा पहुंच सकता है। लिहाजा दोनों गुट अलग अलग दावे कर रहे हैं और अब कांग्रेस में ही पॉवर पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। दोनों नेता अपने अपने समर्थकों को एकजुट कर रहे हैं ताकि राज्यसभा के लिए उनके नाम की मोहर लगे।

दोनों ही विधायकों का समर्थन जुटा रहे हैं और भाजपा की सेंधमारी से बचने के लिए विधायकों को रिसॉर्ट में ठहरा रहे हैं। असल में देखें तो अब कांग्रेस की लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि पार्टी के भीतर दो नेताओं में सिमट कर रह गई है। वहीं माना जा रहा है कि जिस पर सोनिया गांधी का आर्शीवाद होगा वह प्रथम वरीयता के तहत राज्यसभा में पहुंचेगा। हालांकि पार्टी की पहली पसंद शक्ति सिंह गोहिल बताए जा रहे हैं।  गोहिल को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है।

राज्यसभा चुनाव का समीकरण

राज्य की 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में अब कांग्रेस के 65 विधायक ही रह गए हैं। जबकि भाजपा के पास 103 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 35 वोट की जरूरत है। अगर पार्टी के आठ विधायक इस्तीफा नहीं देते तो पार्टी आसानी से दो सीटें जीत सकती थी। वहीं भाजपा ने तीसरी सीट के लिए निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया  है और उसे महज तीन विधायकों के समर्थन  की जरूर है। वहीं राज्य में दो विधायक भारतीय ट्राइबल पार्टी के  और एक विधायक एनसीपी का है। जिस भाजपा अपने पाले में लाने की तैयारी में है।
 

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