चाचा-भतीजे के बीच सियासी 'रण' बनेगा फिरोजाबाद

Published : Dec 08, 2018, 04:37 PM IST
चाचा-भतीजे के बीच सियासी  'रण' बनेगा फिरोजाबाद

सार

शिवपाल की सक्रियता से बढ़ने लगी हैं रामगोपाल यादव की मुश्किलें। फिरोजाबाद से चुनाव लड़ेंगे शिवपाल यादव। सपा महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव हैं इस सीट से सांसद।

यादव परिवार के गढ़ के तौर पर देखी जाने वाली फिरोजाबाद लोकसभा सीट अब यादव परिवार का 'रण' बनेगी। शिवपाल इस सीट पर सपा को टक्टर देने का ऐलान कर चुके हैं और सपा महासचिव रामगोपाल यादव अपने बेटे अक्षय यादव की इस सीट को बचाने के लिए अभी से चुनावों की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में चाचा और भतीजे के बीच चुनावी जंग होना तय माना जा रहा है।

असल में फिरोजाबाद लोकसभा सीट को यादव 'कैपिटल' भी कहा जाता है। इस सीट पर पिछले बीस साल में सपा ( 2009 के उपचुनाव को छोड़कर) का ही कब्जा रहा है। पहली बार 1999 में इस सीट पर सपा के रामजी लाल सुमन ने चुनाव जीता और उसके बाद यह सीट लगभग सपा के ही पास रही। इस लोकसभा क्षेत्र में टुंडला, जसराना, फिरोजाबाद, सिरसागंज व शिकाहोबाद विधानसभा शामिल हैं। पांच विधानसभा क्षेत्रों में से चार पर मौजूदा समय भाजपा के विधायक हैं और एक सिरसागंज से सपा विधायक है। मगर अब सपा विधायक हरिओम यादव इस समय शिवपाल खेमे में हैं। शिवपाल परिवार में ‘रार’ के पीछे सपा के मौजूदा प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव व अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव को जिम्मेदार मानते हैं। शिवपाल ने नई पार्टी बनाने के बाद फिरोजाबाद से ही लोकसभा चुनाव लड़ने की ऐलान कर रखा है। हालांकि वे इटावा जिले की अपनी परम्परागत सीट जसवंतनगर से विधायक हैं। मगर वे अब लोकसभा चुनाव जीतने पर जसवंतनगर सीट से बेटे अक्षय यादव की राजनैतिक पारी शुरू कराना चाहते हैं।

शिवपाल की सक्रियता को देखते हुए रामगोपाल यादव ने अभी से यादव वोटों की गोलबंदी शुरू कर दी है। उन्होंने यहां शुक्रवार को रैली कर इस सीट पर सपा प्रत्याशी के तौर पर अक्षय यादव के उतरने का ऐलान कर दिया। इससे साफ हो गया है कि आगामी लोकसभा चुनाव में समाजवादी परिवार के लिए फिरोजाबाद सीट का चुनाव रोचक होगा। यहां चाचा-भतीजे सीधे मुकाबले में होंगे। मुलायम परिवार की कई रिश्तेदारियां यहां हैं। हालांकि इनका जुड़ाव रामगोपाल से कहीं अधिक मुलायम-शिवपाल से ही रहा है। इसके बावजूद फिरोजाबाद अखिलेश यादव तक को झटका दे चुका है। अखिलेश यादव के कन्नौज और फिरोजाबाद सीट जीतने के बाद 2009 में अखिलेश डिंपल यादव को नहीं जिता पाए थे। बहरहाल अलग राह चुनने के बाद शिवपाल यादव ने सबसे अधिक मेहनत फिरोजाबाद में ही की है।

अगले साल देश में आम लोकसभा चुनाव होने हैं। सत्ता पक्ष हो या फिर विपक्ष सभी का फोकस उत्तर प्रदेश पर हैं। लेकिन राज्य की सियासत दिन  प्रतिदिन बदल रही है। कभी राज्य की सत्ता पर काबिज सपा अपनों की बगावत से जूझ रही और उसे राजनैतिक चुनौती मिल रही है। राज्य में सपा को भाजपा के साथ ही कभी उसके कद्दावर नेता रहे शिवपाल सिंह यादव से मिल रही है। शिवपाल की कभी सपा संगठन पर मजबूत पकड़ मानी जाती थी। लिहाजा सपा नेतृत्व से नाराज चल रहे ज्यादातर नेताओं ने शिवपाल का दामन थामना बेहतर समझा। हालांकि सपा शिवपाल पर आरोप लगाती है कि वह भाजपा के हाथ की कठपुतली है। लेकिन वह सपा के इस आरोप को खारिज करते हुए कहते हैं कि सपा में उन्हें अपमानित किया गया। हालांकि अभी तक शिवपाल सपा के सदस्य भी हैं और विधायक भी। सपा ने उन्हें पार्टी के बाहर का रास्ता नहीं दिखाया है। जबकि शिवपाल ने अभी तक समाजवादी प्रगतिशील पार्टी (लोहिया) में किसी पद को नहीं संभाला है। 

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