इस भारतवंशी एस्ट्रोनॉमर को मिलेगा शॉ पुरस्कार 2024- बहन है देश की सबसे बड़ी IT कंपनी की अध्यक्ष

Surya Prakash Tripathi |  
Published : May 24, 2024, 06:59 PM IST
इस भारतवंशी एस्ट्रोनॉमर को मिलेगा शॉ पुरस्कार 2024- बहन है देश की सबसे बड़ी IT कंपनी की अध्यक्ष

सार

नई दिल्ली। अमेरिका में खगोल विज्ञान (Astronomy) के भारतवंशी प्रोफेसर श्रीनिवास आर कुलकर्णी को खगोल विज्ञान में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए प्रतिष्ठित शॉ पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मिलीसेकंड पल्सर गामा-किरण विस्फोट सुपरनोवा और अन्य परिवर्तनीय या क्षणिक खगोलीय पिंडों की खोज के लिए जाना जाता है।

नई दिल्ली। अमेरिका में खगोल विज्ञान (Astronomy) के भारतवंशी प्रोफेसर श्रीनिवास आर कुलकर्णी को खगोल विज्ञान में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए प्रतिष्ठित शॉ पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मिलीसेकंड पल्सर गामा-किरण विस्फोट सुपरनोवा और अन्य परिवर्तनीय या क्षणिक खगोलीय पिंडों की खोज के लिए जाना जाता है। यह सम्मान उन्हें इस साल के आखिरी में 12 नवंबर 2024 को हांगकांग में आयोजित समारोह में दिया जाएगा।

पुरस्कार में मिलेगा 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर
अमेरिका में खगोल विज्ञान के भारतवंशी प्रोफेसर श्रीनिवास आर कुलकर्णी को एस्ट्रोनॉमी के लिए इस पुरस्कार को देने की घोषणा गत 21 मई 2024 को शॉ पुरस्कार फाउंडेशन की ओर से की गई। 2006 से 2018 तक इन्होंने कैलटेक ऑप्टिकल ऑब्जर्वेटरीज के डायरेक्टर के रूप में काम किया। शॉ पुरस्कार में तीन वार्षिक पुरस्कार- एस्ट्रोनॉमी, लाइफ साइंस और मेडिकल एंड मैथमेटिकल साइंस शामिल हैं। प्रत्येक पुरस्कार में 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर का मौद्रिक पुरस्कार दिया जाता है।

महाराष्ट्र में जन्मे कुलकर्णी 3 बहनों के बीच हैं इकलौते भाई
श्रीनिवास रामचंद्र कुलकर्णी का जन्म 4 अक्टूबर 1956 को महाराष्ट्र के छोटे से शहर कुरुंदवाड़ में एक हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता डॉ. आर.एच. कुलकर्णी हुबली में रहने वाले एक सर्जन थे और उनकी मां विमला कुलकर्णी एक गृहिणी थीं। वे तीन बहनों सुनंदा कुलकर्णी, सुधा मूर्ति (शिक्षिका, लेखिका, परोपकारी और इन्फोसिस के सह-संस्थापकों में से एक की पत्नी) और जयश्री देशपांडे (गुरुराज देशपांडे की पत्नी) के इकलौते भाई हैं। 

प्रारंभिक शिक्षा हुई ककर्नाटक में
कुलकर्णी और उनकी बहनें हुबली, कर्नाटक में पले-बढ़े और उन्होंने वहीं के स्थानीय स्कूलों में अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने 1978 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से अनुप्रयुक्त भौतिकी में MS और 1983 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से पीएचडी की है। वो वर्तमान में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में खगोल शास्त्र और ग्रह विज्ञान के प्रोफेसर हैं। इसके अतिरिक्त वो कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में केल्टेक ओप्टिकल ओब्जर्वेटरी (COO) के निदेशक भी हैं जो पालमार और कॅक वेधशाला सहित अन्य दूरदर्शियों को देखरेख का काम करते हैं।


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