
नयी दिल्ली। पेरिस ओलंपिक कुश्ती मुकाबले के फाइनल में विनेश फोगाट भले ही 100 ग्राम ज्यादा वजन होने के कारण अयोग्य घोषित कर दी गईं। पर उनके मेडल जीतने की उम्मीद अभी बरकरार है। उन्हें सिल्वर मेडल मिलने की संभावना है। अब यह मुकाबला रिंग में नहीं बल्कि कोर्ट में होगा। भारतीय ओलंपिक संघ ने यह मामला कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स (Court of Arbitration for Sports-CAS) में उठाया था। जिसमें भारत की तरफ से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे पेश होंगे।
कौन हैं हरीश साल्वे?
भारत के 68 वर्षीय मशहूर एडवोकेट हरीश साल्वे के पास बड़े-बड़े केस जीतने और उनकी गुत्थी सुलझाने का अनुभव है। 22 जून 1955 को महाराष्ट्र के मराठी परिवार में जन्मे साल्वे को वकालत का पेशा अपने दादा से विरासत में मिला, जो एक फेमस क्रिमिनल लॉयर थे। पिता केपी साल्वे चार्टर्ड एकाउंटेंट और मां अंब्रिति साल्वे डॉक्टर थी। नागपुर से शुरूआती पढ़ाई की। फिर चार्टर्ड अकाउंटेंट बने। नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री ली। लॉ फर्म से कॅरियर शुरू किया।
लड़ चुके हैं ये हाईप्रोफाइल केस
हरीश साल्वे ने इंटरनेशनल कोर्ट में कुलभूषण जाधव का केस साल 2017 में महज एक रुपये फीस में लड़ा था। पाकिस्तान को कोर्ट में ऐतिहासिक मात दी थी। मशहूर बॉलीवुड एक्टर दिलीप कुमार के ब्लैक मनी केस से साल 1975 में अपने कॅरियर की शुरूआत की थी। हिट एंड रन केस में जब सलमान खान मुसीबत में थे। तब साल 2015 में उनके पक्ष में केस लड़ा। हाई प्रोफाइल नीरा राडिया टेप कांड में भी वकील रहें। देश के दिग्गज कारोबारी रतन टाटा का केस भी साल्वे लड़ चुके हैं।
फोगाट की अयोग्यता को पलटना है मकसद
अब हरीश साल्वे ने विनेश फोगाट केस में पेश होने की सहमति दे दी है। अब तक पेरिस के 4 वकील इस केस को रिप्रेजेंट कर रहे थे। पर अब साल्वे के आने के बाद भारतीय ओलंपिक संघ को नतीजे मिलने की उम्मीद है। दरअसल, कानूनी लड़ाई का मकसद फोगाट की अयोग्यता को पलटना है। यह भी संभव है कि मामले का समाधान तत्काल न हो। सुनवाई की तारीख आगे बढ़ सकती है।
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