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दिवाली की अंधेरी रात में क्यों होती मां काली की पूजा? जानें डरावना सच

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दिवाली की रात क्यों की जाती है काली पूजा ?

दिवाली में एक तरफ जहां मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है तो वहीं आधी रात में मां काली की पूजा की जाती है। इस बार मां काली पूजा का शुभ मुहूर्त रात 10:55 से लेकर 11:45 तक रहेगा।
 

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काली रात्रि तांत्रिकों के लिए होती है महत्वपूर्ण

दिवाली की अमावस्या वाली रात तांत्रिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। वह इस दिन तंत्र-मंत्र की देवी मां काली को प्रसन्न करने के लिए तप करते हैं।
 

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मां काली की पूजा के बिना अधूरा होता है तांत्रिक अनुष्ठान

एक तरफ जहां लोग दिवाली की खुशियां मना रहे होते हैं तो वहीं तांत्रिक भक्तों के लिए यह रात एक भयावह होती है जब मां काली कठिन साधना और तप की परीक्षा लेती है।
 

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इन राज्यों में आधी रात को की जाती है मां काली की पूजा

पश्चिम बंगाल,उड़ीसा, असम में आधी रात को मां काली की पूजा होती है वही कोरबा में दिवाली की रात विशेष अनुष्ठान किया जाता है।


 

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आखिर क्यों करते हैं दिवाली के दिन काली पूजा?

राक्षसों का वध करने के बाद महाकाली शांत नहीं हुईं तो भगवान शिव उनके चरणों में लेट गए थे जिसके बाद उनका क्रोध समाप्त हो गया। यही से मां लक्ष्मी और मां काली की पूजा शुरूआत हुई। 
 

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दो तरीके से होती है दिवाली पर काली पूजा

दिवाली पर एक तो सामान्य पूजा होती है जिसे कोई भी कर सकता है। आप 108 गुलहड़ के फूल, 108 बेलपत्र,108 मिट्टी के दीपक मां काली को चढ़ाए।

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काली मां को प्रसन्न करने के लिए लगाएं ये भोग

पूजा के बाद आप मन को मौसमी फल मिठाई खिचड़ी तली हुई सब्जी और तमाम व्यंजनों का भोग लगा सकते हैं। ऐसा करने से आपको दुखों से तुरंत छुटकारा मिल जाएगा।

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दूसरे तरह पूजा तांत्रिकों के लिए

 ज्यादातर जगहों पर दिवाली के दिन तंत्र साधना के लिए तांत्रिक मां काली की उपासना करते हैं। तांत्रिकों के लिए यह दिन खास होता है वह तप से मां काली को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं ।
 

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