सड़क दुर्घटना में खोया बेटे को तो मुफ्त में हेलमेट और रिफ्लेक्टर बांटना शुरू किया पिता ने

Published : Jan 15, 2024, 11:46 PM ISTUpdated : Jan 15, 2024, 11:48 PM IST
सड़क दुर्घटना में खोया बेटे को तो मुफ्त में हेलमेट और रिफ्लेक्टर बांटना शुरू किया पिता ने

सार

दीपक शर्मा ने जब अपना बेटा खोया था तो 6 महीने तक उन्होंने खुद को घर में कैद कर लिया था। 16 साल का बेटा जिसके बहुत सारे सपने थे लेकिन सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई। बेटे की याद में दीपक ने लोगों को फ्री में हेलमेट और रिफ्लेक्टर बांटना शुरू किया ताकि कोई और अपने जिगर के टुकड़े को खो ना दे।

पंजाब। साल 2017 में दीपक शर्मा ने अपने 16 साल के बेटे मयंक को एक रोड एक्सीडेंट में खो दिया था। इस घटना से उनका पूरा परिवार सदमे में चला गया था। दीपक ने हिम्मत के साथ खुद को खड़ा किया और इस घटना से सबक लेते हुए दूसरों की जिंदगी बचाने की मुहिम में लग गए। माय नेशन हिंदी से दीपक शर्मा ने अपने बारे में और अपनी मुहीम के बारे में बताया। 

पंजाब की फिरोजपुर के रहने वाले दीपक शर्मा का बेटा 7 अक्टूबर 2017 को एक रोड एक्सीडेंट में खत्म हो गया। बेटे के जाने के 6 महीने तक दीपक का पूरा परिवार स्थिर हो चुका था लोगों से मिलना जुलना छोड़ दिया था। हादसे के बारे में दीपक ने बताया की मयंक बैडमिंटन खेलने का बहुत शौकीन था।  7 अक्टूबर को भी वह प्रैक्टिस के लिए ही जा रहा था लेकिन तभी एक बस से टक्कर लगने से मयंक की जान चली गई। यह वह सड़क थी जहां पर भारी वाहनों का गुज़रना अलाउ नहीं था।  लेकिन यातायात नियम का उल्लंघन करते हुए एक बस उस सड़क पर आई और उनके बच्चे की जान ले लिया।

माता पिता थे नेत्रहीन

दीपक ने बताया कि उनका जीवन संघर्ष देख कर ही गुज़रा है। उनके माता-पिता दोनों नेत्रहीन थे लेकिन पिता ने पूरी कोशिश किया कि उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। ग्रेजुएशन कंप्लीट करने के बाद दीपक ने अपनी अकादमी शुरू किया जहां बच्चों को कोचिंग दी जाती थी. कुछ समय के बाद दीपक को सरकारी नौकरी मिल गई और वह सरकारी टीचर बन गए। नौकरी के दौरान दीपक की पत्नी ने अकादमी को संभाल लिया।

बेटे की मौत ने दे दी एक वजह 

दीपक कहते हैं कि बेटे की मौत के बाद जब मैं लोगों से मिलना जुलना छोड़ दिया तो उनके दोस्तों ने उन्हें समझाया कि इस तरह वह डिप्रेशन में चले जाएंगे घर में उनकी पत्नी और बेटी भी है उनके साथ आगे की जिंदगी कैसे गुजरेगी लेकिन दुख था कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था। वह कहते हैं ना कि वक्त सबसे बड़ा मरहम होता है दीपक ने अपना हम काम करने के लिए अपने बेटे के नाम से मयंक फाउंडेशन की शुरूआत किया। फाउंडेशन की शुरू होते ही दीपक के तमाम साथी इसमें जुड़ गए। फाउंडेशन का काम था रोड सेफ्टी को लेकर लोगों में अवेयरनेस फैलाना। दीपक की पूरी टीम लोगों को रिफ्लेक्टर और हेलमेट बंटती है और साथ ही यातायात नियम को लेकर अभियान चलाती है।

बढ़ने लगा मयंक फाउंडेशन का काम

दीपक ने बताया धीरे-धीरे मयंक फाउंडेशन के बारे में शहर के सभी लोग जानने लगे। कुछ लोगों ने इसके लिए फंड भी किया इसलिए मौके मौके पर हमने फ्री में रिफ्लेक्टर और हेलमेट बांटना शुरू किया।  सर्दियों में वह लोगों की गाड़ियों में रिफ्लेक्टर लगाने के लिए मुहीम चलाते हैं। दीपक ने बताया कि कोविद में 32000 फूड किट तैयार करके जरूरतमंदों तक पहुंचाई ताकि कोई भी आदमी भूखा ना सोए सफाई कर्मचारियों को मास्क हैंड सैनिटाइजर बांटने का काम किया।

प्रतिभा गर्ल्स स्कॉलरशिप मुहिम

दीपक ने बताया कि साल 2020 से उन्होंने प्रतिभा गर्ल्स स्कॉलरशिप महिम शुरू किया जिसमें दसवीं और बारहवीं के वह बच्चे जो सरकारी स्कूल से अच्छे नंबर से पास होते हैं उन्हें ₹10000 की स्कॉलरशिप दी गई। मयंक की याद में उन्होंने बैडमिंटन चैंपियनशिप की भी शुरुआत की है इसके साथ-साथ दीपक ने अपने बेटे के लिए लोगों को पर्यावरण के प्रति अवेयर करने का भी अभियान चलाया है जिसके तहत 2000 से ज्यादा पौधों का वृक्षारोपण कराया। 

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