साउथ कोरिया में सीखी तकनीक, नोएडा के एक कमरे में केसर उगाया, कम लागत में कमाई की ट्रेनिंग दे रहें रमेश गेरा

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Sep 05, 2023, 04:48 PM ISTUpdated : Sep 05, 2023, 04:51 PM IST
साउथ कोरिया में सीखी तकनीक, नोएडा के एक कमरे में केसर उगाया, कम लागत में कमाई की ट्रेनिंग दे रहें रमेश गेरा

सार

नोएडा के 64 वर्षीय रिटायर इंजीनियर रमेश गेरा साल 2002 में काम के सिलसिले में साउथ कोरिया गए थे। वहां की हाइड्रोपोनिक फार्मिंग, माइक्रोग्रीन्स, इनडोर केसर खेती जैसी एडवांस फार्मिंग तकनीक से काफी प्रभावित हुए। साउथ कोरिया में 6 महीने रहने के दौरान रमेश गेरा ने अपनी वीकेंड और छुट्टियों के दौरान एडवांस फार्मिंग सीखी।

नोएडा। नोएडा के 64 वर्षीय रिटायर इंजीनियर रमेश गेरा साल 2002 में काम के सिलसिले में साउथ कोरिया गए थे। वहां की हाइड्रोपोनिक फार्मिंग, माइक्रोग्रीन्स, इनडोर केसर खेती जैसी एडवांस फार्मिंग तकनीक से काफी प्रभावित हुए। साउथ कोरिया में 6 महीने रहने के दौरान रमेश गेरा ने अपनी वीकेंड और छुट्टियों के दौरान एडवांस फार्मिंग सीखी। साल 2017 में रिटायर हुए तो फुलटाइम उन्नत खेती का काम शुरु कर दिया। अब नोएडा के 100 स्क्वायर फीट के कमर में केसर उगा रहे हैं।

2017 में रिटायर होने के बाद शुरु की इनडोर केसर फार्मिंग

हिसार, हरियाणा के रहने वाले रमेश गेरा ने साल 1980 में इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग किया। 6 साल पहले उनकी पत्नी की गंभीर बीमारी की वजह से मौत हो गई। बेटा आस्ट्रेलिया और बेटी मुंबई में रहती है। रमेश गेरा कहते हैं कि साल 2017 में रिटायर होने के बाद एडवांस फार्मिंग पर एक्सपेरिमेंट करना शुरु कर दिया। वह यह जानते थे कि सिर्फ कश्मीर में ही अनूकुल जलवायु की वजह से मिट्टी में केसर उगाया जाता है। देश में काफी हद तक ईरान से केसर आयात होता है। फिर उन्होंने नोएडा के एक कमरे से ही केसर उगाने का काम शुरु किया।

 

केसर को फूल देने में लगते हैं 3 महीने 

रमेश गेरा कहते हैं कि केसर उगाने के लिए उपयुक्त जलवायु आर्टिफिशियल रूप से बंद कमरे में बनाई जा सकती है, जिसे हम ग्रीन हाउस कहते हैं। जरुरी उपकरण लगाकर उन्होंने केसर फार्मिंग के अनूकुल वातावरण बनाया। कश्मीर से केसर के बीज लाएं और उन्हें ग्रीन हाउस में उगाना शुरु कर दिया। केसर के बल्बों (बीज) को फूल देने में करीबन 3 महीने लगते हैं। चौथे महीने यानी नवम्बर में फूलों से केसर निकाला जाता है। 

6 लाख की पूंजी से शुरु की इनडोर केसर की खेती

रमेश गेरा ने केसर की खेती के लिए ग्रीन हाउस बनाने में शुरुआती दौर में 4 लाख रुपये खर्च किए थे। कश्मीर से केसर के बीज की खरीद पर 2 लाख रुपये खर्च हुए। कुल 6 लाख रुपये का इंवेस्टमेंट किया। अब वह लोगों को केसर की इनडोर खेती की ट्रेनिंग भी देते हैं। एक बार की लागत के अलावा केसर की खेती में लगने वाली लागत सिर्फ बिजली का बिल ही होती है। यह 4,500 रुपये प्रति माह तक हो सकती है और एक वर्ष में लेबर कॉस्ट 6 से 8 हजार रुपये आती है।

क्या है केसर की कीमत?

इनडोर केसर उपज की क्वालिटी भी कश्मीर के सबसे अच्छे ब्रांड मोगरा के बराबर ही होती है। रमेश गेरा हाइड्रोपोनिक तकनीक से विदेशी सब्जियों और फूलों का भी उत्पादन कर रहे हैं। 50 तरह के माइक्रोग्रीन्स भी उगा रहे हैं। थोक बाजार में 2.40 लाख प्रति किलोग्राम केसर की कीमत है, जबकि खुदरा बाजार में यह 3.50 लाख प्रति किलोग्राम तक बिक सकता है। 

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