12वीं में फेल मनोज कुमार शर्मा कैसे बन गए IPS? भिखारियों के साथ सोए, टैम्पो तक चलाया

By Rajkumar UpadhyayaFirst Published Aug 14, 2023, 3:27 PM IST
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IPS मनोज कुमार शर्मा के रियल लाइफ के संघर्षों की कहानी सुनकर आपको ताज्जुब होगा। जितना संघर्ष उन्होंने अपनी जिंदगी में किया, वैसा संघर्ष कर चंद लोगों ने ही जीवन की ऊंचाइयां छूई हैं। 12वी कक्षा में फेल मनोज कुमार शर्मा यूपीएससी एस्पिरेंट्स के लिए मिसाल हैं।

मुंबई। IPS मनोज कुमार शर्मा के रियल लाइफ के संघर्षों की कहानी सुनकर आपको ताज्जुब होगा। जितना संघर्ष उन्होंने अपनी जिंदगी में किया, वैसा संघर्ष कर चंद लोगों ने ही जीवन की ऊंचाइयां छूई हैं। 12वी कक्षा में फेल मनोज कुमार शर्मा UPSC एस्पिरेंट्स के लिए मिसाल हैं। तमाम मुश्किलों के बावजूद वह दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार UPSC क्रैक कर सिविल सर्विस का हिस्सा बनें, महाराष्ट्र कैडर के IPS हैं। उनकी कहानी युवाओं को प्रेरित करती है। उनकी जिंदगी पर '12वीं फेल' नाम से एक उपन्यास भी लिखा गया है।

9वीं और 10वीं में थर्ड डिवीजन पास

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले मनोज कुमार शर्मा के लिए IPS बनना आसान नहीं था। बचपन से ही वह IAS बनना चाहते थे। पर 12वीं फेल होने के बाद उनका ख्वाब पूरा होता नहीं दिख रहा था। 9वीं और 10वीं क्लास में वह थर्ड डिवीजन से उत्तीर्ण हुए। अब पढ़ाई में इतना कमजोर स्टूडेंट IAS-IPS बनेगा, इसका भरोसा किसी को नहीं था। पर मनोज ने मुश्किलों के सामने हार नहीं मानी और लगातार कोशिश करते रहें।

12वीं फेल होने के बाद शुरु होता है संघर्षों का सफर

12वीं फेल होने के बाद मनोज कुमार शर्मा की जिंदगी में सघर्षों का सफर शुरु होता है। उनके सिर पर छत तक नहीं थी। नतीजतन मनोज को भिखारियों के साथ सोना पड़ा। आर्थिक संकट इस कदर था कि 17-18 साल की उम्र में टैम्पो चलाने का काम किया। उसी दौरान कुछ घंटों के लिए वह लॉकअप में भी बंद किए जाते हैं। लाइब्रेरी में चपरासी का काम किया। उसी दौरान मनोज ने कई मशहूर लेखकों की किताबें पढ़ी और उन पर अमल शुरु किया। एक समय ऐसा था कि उन्होंने शीशे में साल भर तक अपना मुंह नहीं देखा था, क्योंकि उनके पास शीशा नहीं था।

मूवी से कम नहीं है IPS मनोज शर्मा की कहानी

उनकी खुद की जिंदगी किसी मूवी से कम नहीं है। यदि उनकी जिंदगी में श्रद्धा नाम की लड़की नहीं आती तो मनोज शायद इतना आगे बढ़ पातें। दरअसल, 12वीं क्लास में ही मनोज एक लड़की पर फिदा थे। 12वीं फेल होने के बाद उन्हें लगता था कि लड़की उनके प्रपोजल को ठुकरा देगी। इसी वजह से वह अपने मन की बात लड़की को नहीं बता पा रहे थे। बहरहाल, दोनों लोगों के बीच में बात हुई और वहीं से मनोज ने कुछ करने की ठानी। काम करके जीवन चलाते रहें, किसी तरह ग्रेजुएशन किया और यूपीएससी एग्जाम में अपनी किस्मत आजमाई। चौथे प्रयास में मनोज कुमार शर्मा आईपीएस बनें। उनके जीवन का संघर्ष ऐसा है, जिसने बहुत लोगों को मोटिवेट किया है।  

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