
मुरादाबाद। मुरादाबाद के किसान अरेंद्र ने करीबन 7-8 साल पहले प्राकृतिक खेती शुरु की। सब्जियां व अन्य फसलें उगाईं। किसानों को इस सिलसिले में जागरुक करने लगें तो खाद बेचने वाली कम्पनियों के अफसर बेचैन हो गए। माई नेशन हिंदी से बात करते हुए अरेंद्र कहते हैं कि एक खाद कम्पनी के बड़े अफसर ने उनसे मिलकर कहा कि आप जो काम कर रहे हैं, खुद करते रहिए, पर दूसरे किसानों को इस बारे में मत बताइए। इसके बावजूद वह खेती के उन्नत तरीकों के बारे में जानकारी करते रहें, किसानों को जागरुक करते रहें। अब, अरेंद्र गन्ने से 15 तरह के प्रोडक्ट बना रहे हैं, जो लोगों को पसंद आ रहे हैं। साल भर में लाखो रुपये की कमाई हुई है। जिले के विकास भवन में उनका एक आउटलेट भी है।
गन्ने के रस से बनाए मिलेट्स के लड्डू
गुड़ और शक्कर के अलावा किसान अरेंद्र गन्ने के रस से बने हुए मिलेट्स के लड्डू, हर्बल चाय बना रहे हैं। गन्ने का सिरका भी बनाया। गन्ने और इमली की चटनी बनाते हैं। गर्मी के सीजन में गन्ने की आइसक्रीम तैयार की, जो लोगों ने खूब पसंद की। अरेंद्र कहते हैं कि महाराष्ट्र के किसान गन्ने की जलेबी बना रहे हैं। जलेबी बनाने के लिए चीनी की चासनी की जगह गन्ने के रस का उपयोग कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर जो किसान रिसर्च कर रहे हैं। नई नई चीजों को सामने लेकर आ रहे हैं और अन्य किसान उसको फॉलो कर रहे हैं।
उन्नत तरीके से खेती करने में सोशल मीडिया का अहम किरदार
अरेंद्र यूं ही आगे नहीं बढ़ें, बल्कि उनके अंदर वर्षों से उन्नत तरीके से खेती किसानी करने का जज्बा पल रहा था। वह अक्सर सोशल मीडिया पर खेती—किसानी के उन्नत तरीकों के बारे में जानकारी करते रहते थे। नई जानकारी मिली तो उनका उत्साह बढ़ा। सेलिब्रेटिंग फार्मर नाम की एक संस्था से जुड़ें। गूगल मीट पर प्रशिक्षण शुरु हुआ। अरेंद्र कहते हैं कि प्रमुख लड़ाई कृषि उत्पादों के मूल्य की होती है। जैसे, गन्ने का अच्छा मूल्य नहीं मिल पा रहा है। यदि कोई किसान 50 बीघे खेत में गन्ने की बुवाई कर रहा है तो हम कहते हैं कि आधा एकड़ खेत में हमारे बताई हुई विधि से खेती करिए। उस खेती से उपजे गन्ने के बाई प्रोडक्ट बनाकर बाजार में बेचिए। उसकी अच्छी कीमत मिलेगी। अपने जिले मे स्थानीय स्तर पर उस प्रोडक्ट का मार्केट बनाइए। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करिए और आप खुद गन्ने के उत्पादक और व्यापारी बनिए।
जुड़े हैं 8 राज्यों के किसान
अरेंद्र प्राकृतिक तरीके से गन्ने का उत्पादन करते हैं और उसके बाई प्रोडक्ट बनाकर कमाई कर रहे हैं। करीबन 8 राज्यों किसान जुड़े हुए हैं। अरेंद्र कहते हैं कि उनके बनाए गए सभी प्रोडक्ट बिल्कुल प्राकृतिक हैं। उनमें किसी भी तरह के केमिकल का यूज नहीं किया गया है। यदि कोई किसान हमसे जुड़ना चाहता है तो हम उसे खेती के उन्नत तरीको के बारे में बताएंगे ताकि वह अपने उत्पादों को अच्छे मूल्य में बेचकर मुनाफा अर्जित कर सके। मुरादाबाद के विकास भवन में उनका आउटलेट है। उनके बनाए गए प्रोडक्ट की अच्छी बिक्री होती है।
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