पिता ने कर्ज लेकर जमा किया बेटे की स्कूल फीस, अब अभी वही लड़का 55000 Cr. की कंपनी का बना मालिक

Published : Aug 17, 2023, 04:23 PM ISTUpdated : Aug 17, 2023, 06:23 PM IST
पिता ने कर्ज लेकर जमा किया बेटे की स्कूल फीस, अब अभी वही लड़का 55000 Cr. की कंपनी का बना मालिक

सार

कड़ी मेहनत और संघर्ष से इंसान अपनी किस्मत बदल सकता है। इस बात को साबित किया जयंती कनानी ने जिनका पूरा जीवन गरीबी में गुजरा। उनके पिता के ऊपर लाखों का कर्ज था । पिता ने बच्चों की फीस जमा करने के लिए लोगों से कर्ज़ लिया, बेटी की शादी के लिए कर्ज़ लिया। पिता की आधी सैलरी कर्ज उतारने में निकल जा रही थी।

अहमदाबाद. माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और अमेरिकी बिजनेसमैन बिल गेट्स ने कहा है आप गरीब घर में पैदा हुए हैं इसमें आपकी गलती नहीं है लेकिन आप गरीबी में मर जाते हैं तो यह आपकी गलती है। उनके कहने का सीधा-सीधा तात्पर्य यह था कि इंसान मेहनत करके किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है।

कौन है जयंती कनानी 
पॉलीगॉन के सीईओ जयंती कनानी का बचपन गरीबी में गुजरा।  उनके पिता अहमदाबाद की एक डायमंड फैक्ट्री में वर्कर थे। पिता की आमदनी ज्यादा नहीं थी।  घर का खर्च चलाने में मुश्किल होती थी।आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी की स्कूल की फीस भरने के भी पैसे नहीं होते थे। लेकिन किसी तरह जयंती के पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई को पूरी करवाया।  बच्चों की फीस भरने और बेटी की शादी के लिए जयंती के पिता ने कर्जा लिया था। कमाई का आधा हिस्सा कर्ज को वापस करने में जा रहा था।जयंती अपने पिता का कर्ज़ उतारना चाहते थे। स्कूली शिक्षा समाप्त करके जयंती ने नडियाद की धर्म सिंह देसाई यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग किया।



 

इंजीनयरिंग के बाद मिली ६ हज़ार की नौकरी 
इंजीनियरिंग के बाद जयंती को पुणे में नौकरी मिली लेकिन सैलरी सिर्फ छ हज़ार थी। इन पैसों में जयंती सिर्फ अपना खर्च पूरा कर सकते थे। इसी दौरान जयंती के पिता की आंखों में परेशानी के कारण उनकी नौकरी चली गई। अब घर की जिम्मेदारी जयंती के कंधों पर आ गई। घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही थी। जयंती ने कई कंपनी में काम किया लेकिन उन्हें संतुष्टि नहीं मिल रही थी। इसी दौरान जयंती को एक कंपनी में डाटा एनालिस्ट के तौर पर नौकरी मिल गई जहां उनकी मुलाकात संदीप नेलवाल  और अनुराग अर्जुन से हुई। संदीप और अनुराग भी साधारण नौकरी से परेशान थे।  इन तीनों युवाओं की तिकड़ी ने कुछ बड़ा करने की सोच लिया था। जयंती ने डेलोइट और वेलस्पन में भी काम किया था।

तीन दोस्तों ने मिल कर  शुरू किया  पॉलीगॉन
साल 2017 में इन तीनों ने मिलकर पॉलीगॉन की शुरुआत कर दी। पहले इसका नाम मैटिक रखा गया था। आज  पॉलीगॉन दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टो करेंसी इथेरियम की लेनदेन में सहुलत देने वाली कंपनी बन चुकी है। पोलीगॉन में अमेरिका के अरबपति बिजनेसमैन मार्क क्यूबन ने भी निवेश किया।2022 में, पॉलीगॉन ने सॉफ्टबैंक, टाइगर ग्लोबल और सिकोइया कैपिटल इंडिया जैसेनिवेशकों से $450 मिलियन का भारी फंडिंग राउंड हासिल किया।सिर्फ 6 वर्ष के छोटे समय में पॉलीगॉन 55000 करोड़ की वैल्यू वाली कंपनी बन गई।
जयंती क्रिप्टो करेंसी से जुड़े स्टार्टअप के भारत के पहले अरबपति सह संस्थापकों में से एक हैं।


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