उम्र 19 साल, 200 सांप ने डसा-कोबरा ने काटा तो 3 महीना रहे बिस्तर पर, फिर भी 4000 सांपों को किया रेस्क्यू

Published : Aug 17, 2023, 02:07 PM IST
उम्र 19 साल, 200 सांप ने डसा-कोबरा ने काटा तो 3 महीना रहे बिस्तर पर, फिर भी 4000 सांपों को किया रेस्क्यू

सार

जिस उम्र में लोग कॉलेज में दोस्तों के साथ मौज मस्ती करते हैं, कैफेटेरिया में वक्त गुजारते हैं, फिल्म देखने जाते हैं उस उम्र में हरि ओम नारायण सांपों के साथ अपना वक्त गुजारते हैं उनकी उम्र 18 साल है ।अब तक वह 4000 सांपों को रेस्क्यू कर चुके हैं। 200 सांपों ने उनको दशा है। तीन कोबरा काट चुके हैं। इन सबके बावजूद हरि ओम का प्यार सांपों के प्रति कम नहीं होता वह स्नेक मैन ऑफ बिहार कहे जाते हैं।

बिहार.हरि ओम नारायण की उम्र महज़ 19 साल है, लेकिन उनके कारनामे सुनकर बड़े बूढ़े भी दांतो तले उंगली दबा लेते हैं। 8 साल की उम्र से वो सांप रेस्क्यू कर रहे हैं.अब तक 4000 सांपो को रेस्क्यू कर चुके हैं। खुद भी कई बार सांपो का शिकार हुए हैं। माय नेशन हिंदी से हरिओम ने सांपो के बारे में दिलचस्प बातें बताइं । 

कौन है बक्सर के हरि ओम
हरिओम का जन्म बक्सर के दलसागर में हुआ। उनके पिता ज्योतिष हैं। भाई पंजाब नेशनल बैंक में काम करता है। जॉइंट फैमिली में वो रहते हैं जहां, हर रोज 115 लोगों का खाना एक साथ बनता है। हरि ओम ट्वेल्थ पास कर चुके हैं बीएससी में एडमिशन लिया है। सांपों के प्रति दिलचस्पी के बारे में हरिओम कहते हैं जब वह 8 साल के थे तो नहाने वाली टंकी से सांप निकाल रहे थे। इस दौरान सांप ने हरिओम को काट लिया। उसी दिन से उनकी दोस्ती सांपों से हो गई। उस सांप को हरिओम ने पकड़ा और तालाब में ले जाकर छोड़ दिया। हरिओम हर रोज उस तालाब के पास जाकर देखते कि सांप क्या कर रहा है, यह बात हरिओम के माता-पिता को पता चली तो वह परेशान हो गए क्योंकि उनके गांव में सांपों को लेकर अलग-अलग भ्रांतियां फैली थी। माता-पिता के समझाने का भी हरिओम पर कोई असर नहीं हुआ।

एक घर से निकाला 35 कोबरा
पिछले 10 सालों में हरिओम को 200 से ज्यादा सांपों ने काटा है जिनमें तीन जहरीले कोबरा ने काटा है। अभी 30 जून को कोबरा ने उन्हें डस लिया था इसके बाद वह तीन दिन तक अस्पताल में एडमिट थे, और तीन महीना बेड रेस्ट पर थे । हरिओम कहते हैं किसी के शरीर पर चोट के इतने निशान नहीं होंगे जितने मेरे हाथ पैर में सांप के काटने के होंगे। उन्होंने अब तक 4000 सांपों को रेस्क्यू कराया है। हरिओम कहते हैं एक बार उन्होंने एक ही घर से 35 कोबरा को रेस्क्यू कराया था। उस जगह पर एक कोबरा था , जिसने कई अन्य को कोबरा को जन्म दिया और ऐसा करके उनका पूरा घर बन गया।

 
डिस्कवरी के साथ हरिओम ने किया काम 

2019 में हरिओम के हाथ में पहली बार फोन आया जिसके बाद स्नेक रेस्क्यू करने के लिए उनके पास कॉल आने लगी, और इसी काल में एक कॉल ऐसी थी जिसके पीछे की आवाज सुनकर हरि ओम खुशी से उछल गए। यह कॉल डिस्कवरी चैनल से थी जिसमें बताया गया कि वह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक शूटिंग कर रहे हैं जो सांपों पर है। किसी ने डिस्कवरी की टीम को हरिओम के बारे में बताया, इसके बाद हरिओम ने उनके साथ काम किया। वहां रहकर हरिओम ने सीखा कि किस तरह से घायल सांपों को रेस्क्यू करके उनका इलाज किया जाता है फिर जंगल में छोड़ दिया जाता है। हरिओम को यह कॉन्सेप्ट बहुत अच्छा लगा, 

अपने पैसे से बनाया जानवरो का रेस्क्यू सेंटर 

बक्सर वापस आकर उन्होंने बिहार गवर्मेंट को रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए एक याचिका लिखी   , लेकिन प्रशासन की तरफ से उदासीनता को देखकर हरिओम ने चुरामनपुर में 6000 स्क्वायर फिट की एक जमीन किराए पर लिया। डिस्कवरी चैनल से उन्हें जो भी पैसा मिला था वह इस जमीन पर रेस्क्यू सेंटर बनाने में लगा दिया। 25 दिसंबर 2021 को हरिओम का रेस्क्यू सेंटर बनकर तैयार हो चुका था जहां सांप ही नहीं अन्य घायल जानवरों का भी इलाज किया जाता है। हर साल इस जमीन का किराया पचास हज़ार जाता है। लेकिन कुछ लोगों ने फरवरी में इस रेस्क्यू सेंटर को जला दिया जिसमें बहुत सारे सांप जल गए और 3 लाख की दवाओं का नुकसान हुआ। हालांकि कुछ महीनो बाद उनका रेस्क्यू सेंटर दोबारा  बनकर तैयार हो गया।



 

गांव के लोग हरिओम को समझते हैं सपेरा 
हरिओम कहते हैं हम जिस गांव में रहते हैं वहां मॉनसून में बहुत सारे सांप निकल आते हैं गांव के लोगों पर सांप को लेकर अलग-अलग विश्वास है।  हर रोज 5,6 केस मेरे पास सर्पदंश के आते हैं। अब तक 27 लोगों को सर्पदंश से बचा चुका हूं लेकिन फिर भी लोग मुझे एक सपेरे से ज्यादा मुझे  कुछ नहीं समझते। मेरे  माता-पिता को मेरे खिलाफ भड़काते हैं। गांव के लोगों के हिसाब से मैं अपवित्र काम कर रहा हूं।

हरिओम ना तो कूद सकते हैं ना वज़न उठा सकते हैं
सांप काटने से हरिओम के शरीर में बहुत सी बीमारियां हो गई है। वो कहते हैं सांप रेस्क्यू करना मेरा शौक है आप यह भी कह सकती हैं कि मेरा जुनून बन चुका है। अब तक 200 से ज्यादा सांप ने काटा है मुझे, एक कोबरा ने पैर में ऐसा काटा था कि चलना फिरना मुश्किल हो गया था। वैसे भी सांप के बार-बार काटने से शरीर में बहुत सारी परेशानी हो जाती है जैसे मेरे लीवर में बहुत सारी प्रॉब्लम है मैं ज्यादा वजन नहीं उठा सकता हूं, मैं दौड़ नहीं सकता हूं,कूद नहीं सकता हूं। हरिओम कहते हैं मेरे शौक में मेरी मां ने साथ दिया।  उन्हें कई हजार सांपों की जानकारी है उन सांपों में कैसे जहर बनता है मां को सब पता है। वो अपने चाचा के बारे में बताते हैं की उनके चाचा  आईआईटी मद्रास में हैं। सांपों के प्रति हरि ओम की दिलचस्पी देखकर उन्होंने हरिओम को उनके जन्मदिन पर 'स्नेक्स ऑफ इंडिया' नाम की पुस्तक तोहफे में दी ।



 

सांप के प्रति गांव  के लोगों को जागरूक करते हैं हरिओम 
हरिओम के रेस्क्यू सेंटर के जलने के बाद से हरिओम ने सांप रेस्क्यू करने का हज़ार रुपये लेना शुरू कर दिया है। इस पैसे को रेस्क्यू किए हुए जानवरों के इलाज में लगाते हैं। उन्होंने अब तक 300 से ज्यादा घायल जानवरों का इलाज कराया है जिसमें बकरी, कुत्ता, उल्लू और गिद्ध भी है। जब ये जानवर ठीक हो जाते हैं तो हरिओम इन्हें जंगल में छोड़ आते हैं। सांप के काटने के बाद क्या करना चाहिए इस बात के लिए हरिओम गांव  में सबको जागरूक करते हैं। वो कहते हैं मेरे गांव में लोग सांप के काटने पर ओझा पंडित के पास जाते हैं। 

सांप रेपलेंट तैयार किया है हरिओम ने 
हरिओम कहते हैं उनके गांव में सांपों को लेकर बड़े-बड़े अंधविश्वास हैं इसलिए लोग सांपों को देखते ही मारना शुरू कर देते हैं। मैं अपने गांव और सांपों के बीच में शांति चाहता हूं और इसी के लिए मैंने एक सांप रेपेलेंट तैयार किया है जिससे सांप किसी के घर के अंदर नहीं जाएंगे। एक बार सरकार की तरफ से मंजूरी मिल जाए फिर हर मेडिकल स्टोर पर यह रेपलेंट मिलेगा। 

 

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