
नई दिल्ली। हम सभी ने कभी न कभी सफलता की कहानियां सुनी होंगी, जो हमें इंस्पायर करती हैं और हमें कुछ बड़ा करने का हौसला देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है चंडीगढ़ के सिद्धार्थ एस ओबेरॉय की, जिन्होंने अमेरिका की प्रोजेक्ट इंजीनियर की नौकरी छोड़कर भारत लौटने और अपनी खुद की कंपनी शुरू करने का बड़ा फैसला लिया। आज उनकी कम्पनी लेट्सशेव (LetsShave) एक बड़ा ब्रांड बन चुका है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसकी शुरुआत एक छोटे से कमरे से हुई थी। आइए जानते हैं सिद्धार्थ ओबेरॉय की सफलता की कहानी।
सिद्धार्थ ओबेरॉय एजूकेशन
सिद्धार्थ ओबेरॉय का जन्म चंडीगढ़ में हुआ और वहीं उनकी शुरूआती शिक्षा भी हुई। उन्होंने चंडीगढ़ के विवेक हाई स्कूल से अपनी 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। सिद्धार्थ हमेशा से ही पढ़ाई में अच्छे थे और उनका इंटरेस्ट सांइस एंड टेक्नोलॉजी में था, जिससे उन्हें विदेश में पढ़ाई करने का मौका मिला। उन्होंने पर्ड्यू यूनिवर्सिटी, सैपिएन्जा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से एजूकेशन ली।
अमेरिका की प्रोजेक्ट इंजीनियर की जॉब छोड़कर लौटे भारत
सिद्धार्थ ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में एक प्रोजेक्ट इंजीनियर के रूप में करियर की शुरुआत की। यह उनकी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट था, लेकिन इसके बावजूद उनके मन में हमेशा कुछ अलग और बड़ा करने की इच्छा थी। यूनिवर्सिटी के डॉर्म रूम में रहते हुए ही उन्हें शेविंग इंडस्ट्री में कुछ नया करने का विचार आया था, जो उनके दिल में घर कर गया। अमेरिका में रहते हुए सिद्धार्थ को यह एहसास हुआ कि शेविंग के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं और जो हैं, वे या तो महंगे हैं या क्वालिटी में अच्छे नहीं। इसके बाद उन्होंने कुछ अलग करने का मन बना लिया। उन्होंने अपने विचार को शेविंग इंडस्ट्री के कुछ प्रमुख लोगों से साझा किया। हालांकि, तब तक वे अपनी नौकरी में व्यस्त थे और इस विचार पर पूरी तरह से काम नहीं कर पाए।
कोरियाई कंपनी डोरको से साझेदारी, 2015 में लेट्सेशव की शुरूआत
सिद्धार्थ को अपने विचार को अमली जामा पहनाने का मौका तब मिला, जब एक कोरियाई कंपनी डोरको ने उनके साथ साझेदारी करने में रुचि दिखाई। यह उनके लिए एक बड़ा मौक था, और इसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और भारत लौट आए। सिद्धार्थ ने 2015 में लेट्सशेव की शुरुआत की। अम्बाला के 10x10 के एक छोटे से कमरे में उन्होंने काम शुरू किया। शुरुआती दिन बेहद कठिन थे। उन्हें हर महीने केवल 30 से 40 ऑर्डर मिलते थे और कमाई भी महज एक लाख रुपये महीने की होती थी।
4 साल में जुटाया 60 लाख डॉलर का इंवेस्टमेंट
सिद्धार्थ का मकसद था कि वे शेविंग प्रोडक्ट्स में ऐसा कुछ लाएं, जो क्वालिटी में बेहतरीन हो और ग्राहकों को एक नई फेसिलिटी उपलब्ध कराए। इसके लिए उन्होंने डायमंड कोटिंग वाले रेजर ब्लेड पर काम करना शुरू किया। इस नई तकनीक ने उनके प्रोडक्ट्स को न केवल बेहतर बनाया, बल्कि बाजार में उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। अब कंपनी को हर महीने 20,000 से अधिक ऑर्डर मिलते हैं। कंपनी ने महज चार सालों में 60 लाख डॉलर का निवेश जुटाया है और इसे कई बड़े इंवेस्टर्स का सपोर्ट हासिल है, जिनमें कोरियाई रेजर कंपनी डोरको और भारत की दिग्गज कंपनी विप्रो शामिल हैं।
100 से अधिक देशों में बेच रही है अपने प्रोडक्ट्स
2018 में, लेट्सशेव को कोरियाई रेजर कंपनी डोरको से इंवेस्टमेंट मिला, जिसने कंपनी को अपने प्रोडक्ट्स की क्वालिटी को और बेहतर बनाने और उसे बड़े पैमाने पर फैलाने में मदद की। इसके बाद, 2020 में, भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी विप्रो ने भी लेट्सशेव में निवेश किया। यह सिद्धार्थ और उनकी कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। आज, लेट्सशेव 100 से अधिक देशों में अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री कर रही है। सिद्धार्थ की मेहनत और उनके अनोखे विचार ने उन्हें और उनकी कंपनी को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई है। वर्तमान में कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 54 करोड़ रुपये है।
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