
18 साल की सृष्टि शर्मा ने स्केटिंग में अब तक गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में 7 बार अपना नाम दर्ज कराया है। दुनिया की पहली आइस लिम्बो स्केटर हैं। यह रिकॉर्ड बनाना और उपलब्धि हासिल करना सृष्टि के लिए आसान नहीं था इसके पीछे कड़ी मेहनत और माता पिता का संघर्ष है। माय नेशन हिंदी से सृष्टि ने अपने विचार साझा किए।
पहली चैंपियनशिप में ही रिंग से बाहर निकाल दिया गया
नागपुर के छोटे से गांव वैगांव में सृष्टि का जन्म हुआ। उनके पिता धर्मेंद्र वालकेश्वर शर्मा ड्राइवर है, पिता अभी प्रमोट होकर सुपरवाइजर बन गए हैं, सृष्टि दो बहने हैं, नागपुर के वर्धमान नगर के सेंटर प्वाइंट स्कूल से सृष्टि ने 12वीं की पढ़ाई किया। साल 2009 में जब सृष्टि सिर्फ 5 साल की थी तब पहली बार उन्होंने स्केटिंग चैंपियनशिप में भाग लिया था लेकिन स्पीड कम होने के कारण उन्हें रिंग से बाहर निकाल दिया गया, यह बात सृष्टि के दिल पर लग गई और सृष्टि ने स्केटिंग में मेहनत करना शुरू कर दिया। आज सृष्टि अपना ही रिकॉर्ड 7 बार तोड़ चुकी हैं।
सृष्टि ने पहली बार टीवी पर देखा लिंबो स्केटिंग
2012 में जब सृष्टि 8 साल की थी, उन्होंने टीवी पर किसी एथलीट को लिंबो स्केटिंग करते देखा, इस गेम ने उन्हें काफी आकर्षित किया और उन्होंने अपने पिता से कहा कि उन्हें लिंबो स्केटिंग करनी है, पापा ने इजाज़त दे दी, और उसी दिन से लिंबो स्केटिंग का सफर शुरू हो गया। चूंकि लिंबो स्केटिंग में पूरे शरीर को स्ट्रेच करना पड़ता है, इसलिए सृष्टि ने शरीर को लचीला बनाने के लिए योगा करना शुरू किया।
पापा ने लिए 7 लाख रुपए का लोन
सृष्टि कहती हैं मुझे स्केटिंग सिखाने के लिए पापा ने 7 लाख का कर्ज लिया, चूंकि स्केटिंग में एक्सपेंसेस बहुत होते हैं और पापा की कमाई इतनी नहीं थी कि वह इस गेम का खर्चा उठा सकें, लेकिन मेरी मेहनत को देखकर उन्होंने लोन लिया जिसकी ईएमआई वह अभी तक चुका रहे हैं।
हर बार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ती रही सृष्टि
अगस्त 2013 में 3016 मीटर लिंबो स्केटिंग करके सृष्टि ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, 2015 में लिंबो स्केटिंग में तीसरे प्रयास में 17 सेंटीमीटर की हाइट को पार किया और सबसे कम समय में लिंबो स्केटिंग करने का रिकॉर्ड बनाया। 2021 में 7.38 सेकंड के अपने पिछले रिकॉर्ड को सृष्टि ने तोड़ा और 6.94 सेकंड के साथ एक नया रिकॉर्ड बनाया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार सृष्टि ने बिना किसी को छुए 51 होरिजेंटल पोल के नीचे स्केटिंग की जो जमीन से सिर्फ 30 सेंटीमीटर या 12 इंच ऊपर रखी थी।
पैर में लगे चार टांके और खेलना शुरू किया रोलर हॉकी
सृष्टि कहती हैं कि एक बार प्रैक्टिस करने के दौरान मेरे पैर में चोट लग गई। 4 टांके लगे डॉक्टर ने स्केटिंग बंद करने के लिए कहा लेकिन एक्टिव रहने की आदत थी तो रोलर हॉकी खेलना शुरू किया । रोलर हॉकी में जब थोड़ा एक्सपर्ट हुई तो 25वी महाराष्ट्र रोलर स्केटिंग हॉकी चैंपियनशिप में भाग लिया और ब्रोंज मेडल जीत लिया। उसके बात 26वी चैंपियनशिप में भी भाग लिया और इस बार गोल्ड मेडल जीत लिया। रोलर स्केटिंग हॉकी चैंपियनशिप के दौरान जम्मू कश्मीर टीम के कोच ने उनकी स्ट्रैचिंग देखकर आइस लिंबो स्केटिंग करने की सलाह दे दिया।
आइस स्केटिंग के लिए मम्मी ने ब्लेड बनाए
सृष्टि कहती हैं आइस लिंबो स्केटिंग मेरे लिए एक चैलेंज थी क्योंकि यह बहुत मुश्किल काम था, मैंने पापा को बताया तो उन्होंने पता किया कि गुरुग्राम में आइस लिंबो स्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। पापा के साथ में गुरुग्राम गई और आइस स्केटिंग की ट्रेनिंग लिया। लेकिन आइस स्केटिंग की प्रतियोगिता में हार गई क्योंकि मेरे पास रोलर स्केट के ब्लेडस थे, जबकि आइस स्केटिंग के लिए अलग तरह की ब्लेड की जरूरत होती है। उस वक्त मम्मी ने सांता क्लॉस की बग्गी देखकर आइस स्केटिंग के ब्लेड तैयार किए थे। गुरुग्राम में रहकर मैंने आइस स्केटिंग में ग्लाइडिंग करना सीखा। और फिर मैंने आइस स्केटिंग में 17.78 सेंटीमीटर की बाधा को पार करके दुनिया की आइस लिम्बो स्केटर होने का रिकॉर्ड बनाया।
स्केटिंग के साथ-साथ नीट भी क्वालीफाई किया
सृष्टि पढ़ने में अच्छी थी इसलिए उनके स्कूल ने उन्हें काफी सपोर्ट किया सातवीं से 12वीं तक स्कूल ने उनकी पढ़ाई का खर्चा उठाया। सृष्टि डॉक्टर बनना चाहती हैं इसलिए उन्होंने मेहनत से पढ़ाई किया और नीट के रिजल्ट में 516 मार्क्स हासिल किए।
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