लखनऊ साल 2003 की बात है, उस वक़्त मैं 9 साल का था। बुद्धा पार्क के पास खेल रहा था तभी देखा रेल की पटरी पर एक 4 या 5 साल की मासूम बच्ची जा रही थी, एक तरफ से रेल आ रही थी, मैंने उसे आवाज़ दिया लेकिन वो सुन न सकी, मैं भागता चला गया, अपनी जान की कीमत भूल गया और उस मासूम को बचा लिया लेकिन मेरा पैर और दोनों हाथ कट गए।  मैं अपनी आँखों से खुद को अपंग होते हुए देख रहा था। माय नेशन हिंदी से बात करते हुए रियाज़ का गला भर्रा गया लेकिन वो अपनी ज़िंदगी की कहानी बताते रहे। 


देश विदेश में बहादुरी के चर्चे होने लगे 

जिसने इस हादसे को अपनी आंखों से देखा वो सब सहम गए. ट्रेन चली गयी तो स्थानीय लोग रियाज़ को लेकर अस्पताल भागे, पूरे शहर में खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। हर जगह 9  साल के मासूम रियाज़ की बहादुरी के चर्चे चल रहे थे। मिडिया ने अस्पताल घेर लिया था। बात हिंदुस्तान से निकल इंटरनेशनल मिडिया तक पहुंच गई। देश विदेश के अखबारों में रियाज़ की बहादुरी को लेकर बड़े बड़े कालम छप रहे थे और रियाज़ अस्पताल में में ज़िंदगी और मौत से जंग लड़ा रहा था 

अवार्ड देने के लिए सिंगापुर और मॉरीशस बुलाया गया 
रियाज़ मौत से लड़ कर बाहर आ चुका  था लेकिन एक पैर और दो हाथ कट चुके थे।  वो अपंग हो चुका था। महीना गुज़र गया और  रियाज़ सेलिब्रिटी बन चुके थे । उसे  ब्रेवरी अवार्ड देने के लिए सिंगापुर और मॉरीशस बुलाया गया, मौजूद राष्ट्रपति  एपीजे अब्दुल कलाम ने रियाज़ को संजय चोपड़ा वीरता अवार्ड से सम्मानित किया, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रियाज़ से मिलकर उसकी बहादुरी की सराहना किया, सारेगामापा में रियाज़ को बुलाया गया, जहाँ हिमेश रेशमिया, नेहा कक्कड़ और जॉन अब्राहम ने रियाज़ से मुलाकात किया। 

लोन लेकर दुकान खोला
रियाज़ ने सीएमएस स्कूल से इंटर किया, बहुत दुःख के साथ वो बताते हैं की  3 लाख रुपये का लोन लेकर एक दुकान खोला,अपंग होने पर सबने मुझे ब्रेवरी अवार्ड दिया लेकिन न तो किसी ने नौकरी दिया, न आर्थिक सहायता। अपनी टूटी ट्राई साइकिल से रियाज़ हर रोज़ तेलीबाग में अपनी छोटी सी गुमटी पर जाते हैं और सुबह से शाम तक दुकान चलाते हैं, दुकान में टॉफ़ी, बिस्किट और मसाले वगैरह बिकते हैं, साल 2003 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में 3 सरकार आ चुकी है लेकिन किसी भी सरकार ने रियाज की मदद नहीं की। रियाज़ योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार गए थे और नौकरी की मांग किया है।

 

 


पूरे घर की ज़िम्मेदारी रियाज़ पर है 
रियाज के पिता मोहम्मद अहमद मानसिक बीमारी के कारण घर पर ही रहते थे परिवार में तीन छोटी बहन इक़रा, अज़रा, रूबी और एक भाई अमन है। साल 2020 में रियाज़ की शादी भी हुई और एक बेटा भी है जिसके बारे में रियाज़ कहते हैं बचपन से शादी लगी थी, अपंग होने के बाद भी शादी हो गई लेकिन ज़िम्मेदारी बढ़  गयी। नबम्बर 2022 में पिता की मौत ने रियाज़ को तोड़ कर रख दिया,उदास होकर वो कहते हैं गुमटी से महीने में 5,से 6 हज़ार रुपये की कमाई हो पाती है, 11 नवंबर की रात रियाज़ की दुकान से डेढ़ लाख रुपए की चोरी हो गई ₹20000 उधार मांग कर फिर से उन्होंने अपनी दुकान में माल भरा, दिव्यांग होने के बाद भी रियाज़ मेहनत मजदूरी से अपना घर चला रहे हैं लेकिन भीख नहीं मांगा।

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