
पुणे. प्रतीक्षा टोंडवलकर हिम्मत और हौसले की वो मिसाल हैं जिनकी कहानी हर उम्र के इंसान के लिए प्रेरणा है। जिस बैंक में वो 37 साल तक सफाई कर्मचारी थीं उसी बैंक में अपनी मेहनत और लगन से अधिकारी बन गयीं। माय नेशन हिंदी से बात करते हुए प्रतीक्षा ने बताया कि उनका जन्म 1964 में पुणे में हुआ था, 1981 में जब वो 17 साल की थींउनकी शादी हो गयी, उनके पति सदाशिव काडू एसबीआई में बुक बाइंडिंग का काम करते थे ,1984 में जब बेटा विनायक पैदा हुआ तो प्रतीक्षा पति के साथ घरवालों का आशीर्वाद लेने के लिए गांव जा रही थी, रास्ते में एक्सीडेंट हुआ और उनके पति की मृत्यु हो गई जबकि प्रतीक्षा और उनका बेटा बच गया। रोड एक्सीडेंट में पति की मौत हो गयी, दो साल के बच्चे को पालने की ज़िम्मेदारी प्रतीक्षा के कन्धों पर आ गयी।
घर चलाने के लिए प्रतीक्षा ने किया नौकरी
पति की मौत के बाद प्रतीक्षा पर घर सँभालने की ज़िम्मेदारी आ गयी, एक लड़की जो हमेशा घर की चार दीवारी में रही वो कैसे इस मुश्किल समय से लड़ती, खुद की तो भूखे रह कर गुज़र जाती लेकिन गोद में दूधमुँहा बच्चे का भविष्य था, नौकरी करना चाहती थी लेकिन सिर्फ आठवीं तक पढाई की थी। ऐसे समय में एसबीआई ने उनका साथ दिया जहाँ उनके पति काम करते थे, प्रतीक्षा को 1985 में वहां झाड़ू पोछे की नौकरी मिल गयी। इस नौकरी से उन्हें महीने के 65 रूपये मिलने लगे और जीवन थोड़ा सा पटरी पर आ गया। सफाई कर्मी की नौकरी प्रतीक्षा ने कर तो ली लेकिन उनको बार बार ये टीस उठती रही की वो बेहतर नौकरी कर सकती हैं, बस डिग्री की ज़रूरत है।
प्रतीक्षा ने फैसला किया की वो पढाई शुरू करेंगी, उनके इस फैसले में उनके दोस्त और बैंक के कुछ कर्मचारियों ने मदद किया, जिसके बाद प्रतीक्षा ने हाइ स्कूल का इम्तेहान दिया और 60 प्रतिशत अंक से पास किया , फिर 12 वीं का एग्जाम भी पास किया। 1995 में एक नाइट कालेज से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल कर लिया और प्रतीक्षा ने 2021 में प्राकृतिक चिकित्सा कार्यक्रम से स्नातक किया ,अपने बेटे को बेहतर ज़िंदगी देने के लिए प्रतीक्षा खुद भी पढ़ती और बेटे को भी पढ़ाती रहीं।
दूसरे पति का मिला साथ
1993 में प्रतीक्षा ने बैंक के पोस्टमैन प्रमोद टोंडवलकर से शादी कर ली। प्रमोद ने प्रतीक्षा को बैकिंग की परीक्षा में बैठने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके बाद प्रतीक्षा ने कोचिंग क्लासेज जाना शुरू कर दिया, इस दौरान प्रमोद घर संभालते। प्रतीक्षा की हिम्मत, मेहनत और लगन देख कर एसबीआई ने भी प्रतीक्षा का पूरा साथ दिया। पढाई पूरी होने पर प्रतीक्षा को एसबीआई में क्लर्क के रूप में प्रमोशन मिल गया,2004 में प्रतीक्षा ट्रेनी ऑफिसर बन गयीं और 37 साल बाद प्रतीक्षा को उसी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिल गयी।
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