
नई दिल्ली। आपने अक्सर सुना होगा कि लड़कियों को एक सीमा के अंदर ही रहकर काम करना चाहिए। "ये काम नहीं कर सकतीं," "ये उनके बस का नहीं है," जैसे जुमले हर लड़की ने कभी न कभी सुने होंगे। लेकिन कुछ महिलाएं इन चैलेंजेज को पीछे छोड़कर मिसाल कायम करती है। ऐसी ही इंस्पिरेशनल स्टोरी है शशि सोनी की, जिन्होंने सिर्फ 10,000 रुपये से शुरू किए गए छोटे से बिजनेस को 4000 करोड़ रुपये की कंपनी में तब्दील कर दिया। आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी।
1971 में बिजनेस की शुरूआत
साल 1971 में, जब शशि सोनी ने अपने बिजनेस की शुरुआत की, तब उनके पास केवल 10,000 रुपये थे। उन्होंने इस मामूली रकम के साथ "दीप ट्रांसपोर्ट" नाम से एक कंपनी की नींव रखी। यह बिजनेस छोटे स्तर पर ट्रांसपोर्ट सर्विस देता था। शुरुआती दौर में, यह सफर आसान नहीं था। साल 1975 तक, उन्हें लगातार आर्थिक संघर्ष और बिजनेस चैलेंजेज का सामना करना पड़ा।
1985 में मैसूर ऑक्सीजन प्राइवेट लिमिटेड की रखी नींव
शशि ने शुरुआती 10 सालों में काफी स्ट्रगल किया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने एक्सपीरियंस से सीखते हुए 1985 में "मैसूर ऑक्सीजन प्राइवेट लिमिटेड" नाम की एक नई कंपनी की शुरुआत की। इस कंपनी ने इंडस्ट्रियल गैस सप्लाई के सेक्टर में कदम रखा और धीरे-धीरे सफलता की ओर बढ़ने लगी।
2005 में IZMO लिमिटेड की शुरूआत
जैसे-जैसे समय बदला, शशि ने महसूस किया कि उन्हें अपने बिजनेस को तकनीकी क्षेत्र में ले जाना चाहिए। 2005 में, उन्होंने "IZMO लिमिटेड" नाम की एक कंपनी शुरू की। IZMO लिमिटेड मार्केटिंग और ई-रिटेलिंग सॉल्यूशंस देने का काम करती है। यह कंपनी ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के लिए टेक्नोलॉजी और डिजिटल सॉल्यूशंस तैयार करती है। आज, IZMO लिमिटेड का कारोबार अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में फैला हुआ है। उनकी कंपनी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में लिस्टेड है।
हजारों महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
शशि सोनी की सफलता केवल बिजनेस तक सीमित नहीं है। उन्होंने समाज के लिए भी बहुत कुछ किया है। उनकी "दीप जनसेवा समिति" महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, पेंशन योजनाओं और दिव्यांगों की देखभाल जैसे क्षेत्रों में काम करती है। इस समिति ने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद की है।
2024 में पद्मभूषण से सम्मानित
शशि की मेहनत और उपलब्धियों को भारत सरकार ने भी सराहा। 1990 में उन्हें "महिला गौरव पुरस्कार" से सम्मानित किया गया। 2024 में, उन्हें "पद्मभूषण" से नवाजा गया। इसके अलावा, शशि अखिल भारतीय औद्योगिक गैस विनिर्माण संघ और तकनीकी विकास निदेशालय की प्रबंध समिति का भी हिस्सा रहीं।
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