
दिल्ली .हिंदुस्तानियों के लिए चाय सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं बल्कि जज्बात है। कॉलेज कैंटीन हो या फिर सरकारी दफ्तर चाय पर घंटों चर्चा करते हैं दोस्तों से गप्पे लड़ाते हैं। यह कह सकते हैं कि चाय हिंदुस्तानियों के लिए एक बहुत बड़ी कमजोरी है, जिसे लेकर बड़े बड़े शायरों ने शायरी की है। आजकल के युवा चाय पर रील बना रहे हैं और अब तो स्कूल कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट चाय के स्टार्ट अप से लाखों-करोड़ों कमा रहे हैं। इस कड़ी में मायनेशन हिंदी से चाय सेठ के संस्थापक अर्पित राज ने अपनी बातें साझा की।
चाय की टपरी बन गई चाय सेठ
बिहार के अर्पित ने साल 2015 में मेघालय में एक चाय की छोटी सी दुकान खोली उस वक्त अर्पित बीबीए की पढ़ाई कर रहे थे। दिनभर की पढ़ाई के बाद रात में ही घूमने टहलने का मौका मिलता था। शिलांग का मौसम ठंडा होने के कारण चाय की डिमांड बहुत ज्यादा थी। अर्पित और उनके दोस्तों को अक्सर ही रात में कुछ ना कुछ खाने पीने की तलब लगती थी और इसी तलब ने उन्हें चाय की दुकान खोलने का आइडिया दिया। शुरुआत उन्होंने "चाय की टपरी" नाम से किया था लेकिन बाद में यह चाय सेठ वेंचर बन गया। आज चाय सेठ के 47 आउटलेट पूरे देश में है।
कॉलेज के दौरान टिफिन डिलीवरी का भी काम किया अर्पित ने
अर्पित ने अपने दोस्तों के साथ हॉस्टल के कमरे से टिफिन डिलीवरी की भी सर्विस किया है। यह सर्विस उन लोगों के लिए थी जो रात में खाने की इच्छा रखते थे। होटल में काम करने में कुछ दिक्कतें आती थी जिसकी वजह से अर्पित अपने दोस्तों के साथ एक फ्लैट में शिफ्ट हो गए और वहां पर काम के लिए एक बंगाली महिला को रखा जो स्नैक्स, गोभी पराठे, आलू पराठे तैयार करती थी। डिलीवरी के लिए अर्पित और उनके दोस्त स्कूटर से जाते थे। आधे घंटे के भीतर डिलीवरी का प्रॉमिस किया जाता था।
चल निकला चाय की टपरी
शिलांग में अर्पित की चाय ने अच्छा रिटर्न देना शुरू किया। अर्पित के 5 दोस्त मिलकर चाय का काम कर रहे थे। 2018 में ग्रेजुएशन करने के बाद शिलांग में ही कुछ स्थानीय लोगों ने चाय की दुकान बंद करने के लिए उन्हें फोर्स किया जिसके पीछे नॉर्थ ईस्ट के कायदे कानून थे और इसके अनुसार कोई भी कारोबार चलाने के लिए स्थानीय लोगों को पार्टनर बनाना होता था। चाय की दुकान समेटने का दुख था लेकिन तजुर्बे काफी हो चुके थे।
नौकरी छोड़ शुरू किया चाय का कारोबार
अर्पित को शिलांग छोड़ने का दुख था और अपने कारोबार को बंद करने का भी। दिल्ली आकर अर्पित ने नौकरी करना शुरू कर दिया लेकिन नौकरी में उनका दिल नहीं लग रहा था। 2019 में अर्पित ने नौकरी छोड़ दिया। अपने दोस्तों प्रतीक और प्रेम से अर्पित ने फिर से चाय की दुकान का स्टार्टअप शुरू करने की बात कही। एक दोस्त चार्टर्ड अकाउंटेंट था तो दूसरा सॉफ्टवेयर इंजीनियर। तीनों दोस्तों ने सहमति बनाई और दिल्ली में एक जगह खरीदी चाय जहां चाय की दुकान शुरू कर दी।
कोविड महामारी में हुआ नुकसान
2020 में कोविड के दौरान अर्पित का बिजनेस सभी के बिजनेस की तरह प्रभावित हुआ। कई आउटलेट पर पहले की तरह काम नहीं रहा क्योंकि लोगों ने बाहर का खाना बंद कर दिया था। जिसका असर हमारी दुकान पर पड़ा लेकिन हम सोच चुके थे कि कुछ भी हो जाए हम दुकान नहीं बंद करेंगे। नुकसान की भरपाई करेंगे और फिर से उसी मेहनत और लगन से अपने रोजगार को आसमान की ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
चाय के साथ नाश्ते का सामान भी एड किया
अर्पित कहते हैं हमने लोगों की डिमांड पर चाय की दुकान में स्नैक्स बिस्किट और फास्ट फूड भी ऐड कर लिया। हमारी शॉप पर बीस तरह की चाय मिलती है। फिलहाल मेरा ड्रीम है कि साल 2025 के अंत तक हम 300 आउटलेट खोल लें। पचास हज़ार से शुरू हुआ ये बिज़नेस 3.5 करोड़ तक पहुंच गया है।
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