
हरियाणा. धर्मवीर कंबोज हाईस्कूल पास है और दिल्ली में ऑटो रिक्शा चलाते थे, एक समय था जब बुनियादी जरूरत को पूरा करने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं हुआ करते थे। खुले आसमान के नीचे सोना पड़ता था, शरीर पर फटे कपड़े होते थे, भूखे पेट सोना पड़ता था, इन सब चुनौतियों को झेलते हुए अपने घर पर पैसे भेजने पड़ते थे ताकि घर वालों को यह पता रहे कि उनका बेटा दिल्ली जाकर कमा रहा है ।आज 15 देशों में उनकी पेटेंट मशीनें बिक रही है। वो एक किसान, बिज़नेसमैन इंटरप्रेन्योर के नाम से जाने जाते हैं और करोड़ों रुपए के मालिक हैं माय नेशन हिंदी से धर्मवीर कम्बोज की खास बातचीत के कुछ अंश
कौन है धर्मवीर कंबोज
हरियाणा के यमुनानगर में धरमबीर कंबोज का जन्म 1963 में हुआ। पांच भाई बहनों में वह सबसे छोटे थे उन्होंने सिर्फ हाई स्कूल पास किया है, धर्मवीर की मां जड़ी बूटियों का काम करती थी ।आर्थिक स्थिति तंग होने के कारण धर्मवीर को पढ़ाई छोड़ना पड़ा और वह अपनी जेब में 70 रुपये लेकर दिल्ली चले आए। 1987 से 1993 तक उन्होंने दिल्ली में रिक्शा चलाया। खुद का रिक्शा भी नहीं था इसलिए हर रोज का 6 रुपया किराया भी देना पड़ता था । रिक्शा चला कर भी हालात नहीं बदल रहे थे। कभी प्लेटफार्म पर सोते थे, कभी रैनबसेरे में तो कभी फुटपाथ पर। ठंड के मौसम में लोगों से पैसा मांग कर कम्बल खरीदना पड़ता था, अक्सर भूखे पेट सोना पड़ता था। बरसात के दिनों में भीगे कपड़ों में रात गुजारनी पड़ती थी। मगर दिल्ली ने तजुर्बे बहुत दिए। एक बार एक एक्सीडेंट हुआ और धर्मवीर वापस गांव चले गए।
धर्मवीर ने बनाई अपनी मशीन
गांव आकर धर्मवीर ने खेती करना शुरू किया। अपनी मां को जड़ी-बूटी लगाते देख उनके मन में जड़ी बूटियों को लेकर जिज्ञासा बनी रहती थी। 6 महीने तक कृषि पद्धतियों में सुधार के बारे में जानकारी अर्जित करने के लिए धर्मवीर ने ग्राम विकास सोसाइटी में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में पार्टिसिपेट किया। सन 2004 में धर्मवीर राजस्थान गए और औषधीय फसलों की फार्मिंग के बारे में जाना। गांव लौट कर इन फसलों को उगाना शुरू कर दिया। इस काम से आमदनी अच्छी मिल रही थी लेकिन धर्मवीर औषधियों के प्रोसेसिंग बिज़नेस के बारे में सोचने लगे। प्रोसेसिंग मशीने महंगी थीं तो धर्मवीर ने खुद एक प्रोसेसिंग मशीन का स्केच बनाया फिर एक स्थानीय मेकैनिक से सम्पर्क किया। मेकैनिक ने मशीन बनाने के 35 हज़ार रुपये मांगे। उन्होंने 20 हज़ार रुपये देकर मशीन बनवाना शुरू किया जिसमें 8 महीने लगे। मशीन का नाम "मल्टी प्रोसेसिंग मशीन" रखा।
मशीन से किसानो को हुई आसानी
हाल ही में धर्मवीर ने लहसुन छीलने वाली मशीन बनाई जो एक घण्टे में 200 किलो लहसुन छिलती है। उन्होंने मक्का से दूध निकालने वाली मशीन बनाई, इसके अलावा कम्बोज तुलसी का तेल, हल्दी का अर्क, सोयाबीन का दूध, गुलाब जल, ज़ीरा जल तैयार करते हैं। एलोवेरा जूस निकालने की मशीन, सब्ज़ियों का छिलका उतारने की मशीन बनाया। धर्मवीर कम्बोज की बनाई मशीने आज 20 से ज़्यादा देशों में निर्यात की जा रही है। धर्मवीर की बनाई मशीनों से किसानो का काम बहुत आसान हो गया।
राष्ट्रपति के मेहमान बने धर्मवीर
साल 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कम्बोज को सम्मानित किया। 2012 में केंद्रीय मंत्री शरद पावर ने फॉर्मर साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया। साल 2013 में फ़ूड प्रोसेसिंग बनाने पर नेशनल अवार्ड मिला। 2014 में जुलाई के पूरे महीने वो राष्ट्र्पति के अतिथि बनकर रहे। मल्टी परपज़ मशीन बनाने पर साल 2015 में ज़िंबाबवे के राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। एक रिक्शा चालक से शुरू हुआ सफर सांइटिस्ट एक किसान और एक सफल बिज़नेस के रूप में कामयाब हुआ धर्मवीर की हाड़तोड़ मेहनत थी।
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