10वीं पास इस लड़के ने कर दिया कमाल...कबाड़ में खड़ी बोलेरो गाड़ी अब कूटती है धान, आ रही किसानों के काम 

By Rajkumar UpadhyayaFirst Published Oct 26, 2023, 10:03 PM IST
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कहते हैं कि टैलेंट अपना रास्ता खुद बना लेता है। यूपी के गोंडा जिले के परसपुर ब्लाक के पसका निवासी राजकुमार मिश्रा की सफलता की कहानी यही बता रही है। जिन्‍होंने कबाड़ में रखी बोलेरो गाड़ी से धान कूटने की मशीन बनाकर सबको चौंका दिया।

गोंडा। कहते हैं कि टैलेंट अपना रास्ता खुद बना लेता है। यूपी के गोंडा जिले के परसपुर ब्लाक के पसका निवासी राजकुमार मिश्रा की सफलता की कहानी यही बता रही है। पिता अवधेश कुमार मिश्रा आटा चक्की चलाते थे। पूरे परिवार के जीवन-यापन का यही एकमात्र जरिया था। माई नेशन हिंदी से बात करते हुए राजकुमार मिश्रा कहते हैं कि बेहद गरीबी में जन्मे, जब होश संभाला तो परिवार की माली हालत को देखते हुए पारिवारिक काम को आगे बढ़ाया। साल 2011 में धान कूटने और तेल निकालने की मशीन लगाई।

बिजनेस ठप हुआ तो काम आया जुगाड़, आवश्यकता ने करा दिया आविष्कार

उसी समय गांवों में ट्रैक्टर मिल का चलन शुरु हो गया। ट्रैक्टर मिल किसानों के घर-घर जाकर धान कूटने लगीं। राजकुमार मिश्रा का कारोबार उससे प्रभावित होने लगा। आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं थी कि वह भी ट्रैक्टर मिल खरीदकर बाजार में उतर जाए। कहते हैं कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है। राजकुमार​ मिश्रा के साथ भी यही हुआ। उन्होंने कबाड़ से बोलेरो गाड़ी खरीदी, उसे मॉडिफाई किया, गाड़ी के इंजन और पहियों का यूज करके धान कूटने की मशीन बना डाली और गांव में घर-घर जाकर धान कूटने का काम शुरु कर दिया।

 

कबाड़ में रखी बोलेरो पर धान कूटने की मशीन बनाकर चला रहे सक्सेसफुली

राजकुमार मिश्रा ने कबाड़ी की बोलेरो से साल 2021 में पहली धान कूटने की मशीन बनाई और साल 2022 में 3 ऐसी ही और मशीनें बनाईं। उन्होंने टाटा 407 से भी मशीन बनाई। पर वह गाड़ी साइज में इतनी बड़ी थी कि गांव के कच्चे-पक्के रास्तों पर जाने में दिक्कत होती थी तो फिर गांवों की गलियों के लिहाज से एक तीसरा मॉडल बनाया। पिछले 2 साल से धान कूटने की मशीनों को सक्सेसफुली चला रहे हैं और उससे कमाई भी कर रहे हैं। 

किसान करते हैं पसंद, निकालती है 70 फीसदी चावल

राजकुमार मिश्रा की बनाई धान कूटने की मशीन को किसान बहुत पंसद करते हैं, क्योंकि ये 70 फीसदी तक चावल निकालती है। मशीन बनाने में उनका साल 2011 से धान​ कूटने का अनुभव काम आया। वह कहते हैं कि जब 2011 के बाद हमारा काम ठप हो गया तो हमने जुगाड़ से धान कूटने की मशीन बनाई। इसकी मार्केट में खूब डिमांड है। अभी इसी मशीन का यूज कर किसानों के धान कूट रहे हैं।

 

ग्रास रूट स्टार्टअप कैटेगरी में मिल चुका है एक लाख का पुरस्कार

हाल ही में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी में ग्रास रूट स्टार्टअप कैटेगरी में कबाड़ में रखी बोलेरो पर धान कूटने की मशीन बनाने के लिए राजकुमार मिश्रा को एक लाख रुपये का पुरस्कार भी मिला है। इसके पहले राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में भी उन्हें 10 हजार रुपये का पुरस्कार मिला था। 

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