बिहार ई-रिक्शा चालक की बेटी बनी दरोगा, गरीबी से लड़कर कैसे पाया मुकाम?

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Aug 12, 2024, 02:01 PM ISTUpdated : Aug 12, 2024, 02:04 PM IST
बिहार ई-रिक्शा चालक की बेटी बनी दरोगा, गरीबी से लड़कर कैसे पाया मुकाम?

सार

बिहार की बेटी रोशनी कुमारी ने गरीबी से जूझते हुए दरोगा की परीक्षा पास की। उनके पिता ई-रिक्शा चालक और मां गृहिणी हैं आइए जानते हैं कि कैसे उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

पूर्णिया (बिहार): बेटियां हर क्षेत्र में न सिर्फ अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि उन परिस्थितियों से भी जूझ रही हैं जो कभी उनके सपनों की राह में रोड़ा बनती थीं। ऐसे ही संघर्ष और दृढ़ता की मिसाल हैं पूर्णिया की रहने वाली रोशनी कुमारी, जिनके पिता ई-रिक्शा चलाते हैं और पेंट पॉलिश का काम करते हैं। गरीबी की तमाम चुनौतियों के बावजूद रोशनी ने बिहार दरोगा की परीक्षा पास कर अपने परिवार, समाज, और गुरुजनों का नाम रोशन किया है।

गरीबी से संघर्ष, हिम्मत से जीत

ई-रिक्शा चलाने वाले रोशनी के पिता कन्हैया लाल दास ने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वे दिन-रात मेहनत करते हैं, ताकि परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकें। बेटी रोशनी ने अपने पिता के मेहनत की लाज रखी। गरीबी और कठिनाइयों से जूझते हुए बिहार दरोगा का एग्जाम पास किया। मां रेखा देवी हाउस वाइफ हैं। कन्हैया लाल ने बिटिया के पढ़ाई के सपने को कभी मरने नहीं दिया। पैसों की कमी को पूरा करने के लिए पेंट पॉलिश का काम भी करते थे।

बचपन से था सरकारी नौकरी का सपना

रोशनी का कहना है कि बचपन से ही उनके मन में सरकारी नौकरी करने का सपना था। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह सपना पूरा करना आसान नहीं था। लेकिन रोशनी ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार मेहनत की और बीपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की, पर उस एग्जाम को क्लियर करने में काफी समय लग रहा था। इसी बीच उन्हें दरोगा की बहाली की जानकारी मिली और वह दरोगा भर्ती की तैयारी में जुट गईं। उनकी मेहनत रंग लाई, और दरोगा की परीक्षा पास कर ली।

महिलाओं के उत्थान और गरीबों की भलाई का संकल्प

वह हमेशा महिलाओं के उत्थान और गरीबों की भलाई के लिए काम करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त को उनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी पूरा हो गया, और इस महीने के अंत तक वे अपने पद पर नियुक्त होकर प्रदेश की सेवा करेंगी। उनकी सफलता में टीचर्स का भी बड़ा योगदान रहा है। टीचर भी रोशनी की कड़ी मेहनत और लगन की तारीफ करते हैं। रोशनी ने गरीबी से जूझते हुए, कठिन परिस्थितियों का सामना कर अपनी पढ़ाई जारी रखी और दरोगा बनने तक का सफर तय किया। उनकी यह सफलता उन सभी गरीब छात्राओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी परिस्थितियों के कारण सपनों को पूरा करने में हिचकिचाती हैं। रोशनी की सफलता पर उनके पैरेंट्स अपने आंसू नहीं रोक पाए, परिवार का सिर ऊंचा करने के लिए बेटी पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

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