यूपी के इस गांव को कहा जाता है IAS-PCS की फैक्ट्री, जानिए क्यों?

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Feb 02, 2024, 11:05 PM ISTUpdated : Feb 02, 2024, 11:08 PM IST
यूपी के इस गांव को कहा जाता है IAS-PCS की फैक्ट्री, जानिए क्यों?

सार

गांव से निकले युवा बड़े साइंटिस्ट भी बने हैं। विश्व बैंक में कार्यरत जन्मेजय सिंह, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. नीरू सिंह और लालेंद्र प्रताप सिंह, इसरो के साइंटिस्ट डॉ. ज्ञानू मिश्रा भी माधोपट्टी गांव के हैं। देवेंद्र नाथ सिंह गुजरात के सूचना निदेशक के पर पर कार्यरत रहें।

जौनपुर। हॉयर एजूकेशन ले रहे ज्यादातर यूथ का सपना सिविल सर्विसेज ज्वाइन करने का होता है। हर साल लाखों की संख्या में एस्पिरेंट्स यूपीएससी एग्जाम में शामिल भी होते हैं। पर चंद लोगों को ही सक्सेस मिलती है। ऐसे में यह सुनकर आप भी हैरान होंगे कि यूपी के जौनपुर जिले में एक ऐसा गांव है। जिसे IAS-PCS की फैक्ट्री कहा जाता है। 75 परिवार वाले गांव ने 51 ब्यूरोक्रेट्स दिएं, जो बड़े पदों पर रहें। देश भर में इस गांव के किस्से मशहूर हैं।

करीबन हर परिवार में प्रशासनिक अफसर

हम बात कर रहे हैं जौनपुर जिले के माधोपट्टी गांव की। गांव के करीबन हर परिवार में प्रशासनिक अफसर हैं। गांव के बारे में यह भी कहा जाता है कि यहां के लोगों पर मां सरस्वती का आशीर्वाद है। दूर—दूर से लोग गांव के माहौल को समझने आते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिरकार इस गांव में ऐसी क्या खासियत है कि यह गांव सिविल सर्वेंट की फैक्ट्री बन गया है। हालांकि कभी ग्राम पंचायत रहा यह गांव अब नगर पंचायत बन चुका है।

एक परिवार के पांच भाई आईएएस 

देश के आजाद होने के बाद माधोपट्टी गांव के डॉ. इंदूप्रकाश ने साल 1952 में यूपीएससी में दूसरी रैंक पाई। उन्होंने विदेश सेवा में लंबे समय तक काम किया। फ्रांस समेत कई देशों में राजदूत रहें। उसके बाद लगातार उनके चारो भाई भी प्रशासनिक अफसर बनें। साल 1955 में उनके भाई विनय कुमार सिंह ने इतिहास रचा। तब उन्होंने यूपीएससी एग्जाम में आल इंडिया 13वीं रैंक हासिल की थी। बिहार राज्य के चीफ सेक्रेटरी के पद पर रहें। 1964 में छत्रसाल सिंह आईएएस बने, जो बाद में तमिलनाडु के चीफ सेक्रेटरी बने। उसी साल अजय सिंह का भी सिविल सर्विस में चयन हुआ और 1968 में शशिकांत सिंह ने आईएएस बनकर कीर्तिमान स्थापित कर दिया। परिवार के सभी भाई आईएएस कैडर में आएं।

इंदू प्रकाश की दूसरी पीढ़ी के युवा भी आईएएस

गांव के लोगों में आईएएस बनने की ऐसी ललक जगी कि फिर लगातार साल दर साल युवाओं का चयन यूपीएससी एग्जाम में होने लगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि गांव के पहले आईएएस इंदूप्रकाश की दूसरी पीढ़ी के युवा भी आईएएस अफसर हैं। खुद इंदूप्रकाश के बेटे यशस्वी 2002 में यूपीएससी एग्जाम में 31वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने। परिवार के ही अमिताभ सिंह का भी चयन विदेश सेवा में हुआ।

बेटियां और बहुएं भी अधिकारी

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में सिर्फ 75 परिवार हैं। जिनमें से 51 लोग प्रशासनिक अफसर हैं। 40 लोग तो सिर्फ आईएएस हैं। इसके अलावा पीसीएस व अन्य सेवाओं में भी लोग कार्यरत हैं। गांव की बेटियां और बहुएं भी अधिकारी हैं। गांव से निकले पीसीएस अधिकारियों की एक लम्बी फेहरिस्त है।

गांव से निकले बड़े वैज्ञानिक

गांव से निकले युवा बड़े साइंटिस्ट भी बने हैं। विश्व बैंक में कार्यरत जन्मेजय सिंह, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. नीरू सिंह और लालेंद्र प्रताप सिंह, इसरो के साइंटिस्ट डॉ. ज्ञानू मिश्रा भी माधोपट्टी गांव के हैं। देवेंद्र नाथ सिंह गुजरात के सूचना निदेशक के पर पर कार्यरत रहें।

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