
रायपुर। छत्तीसगढ़ की महिलाएं गोबर से पेंट बनाकर मल्टीनेशनल कंपनियों को टक्कर दे रही हैं। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि गोबर से अब इमल्शन और डिस्टेंपर पेंट भी बनाया जा रहा है। ये प्राकृतिक पेंट रायपुर के गौठानों में बन रहा है। जिसकी कीमत बाजार में मिलने वाले पेंट से काफी कम है। इसी वजह से प्राकृतिक पेंट की डिमांड भी है। स्वंय सहायता समूह की महिलाएं हर महीने हजारो लीटर पेंट बेचकर मुनाफा भी कमा रही हैं।
6 महीने में 3.30 लाख का मुनाफा
बालोद जिले के बरही गौठान की स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष साक्षी सिन्हा कहती हैं कि गोबर से पेंट बनाने का काम उन्होंने जनवरी 2023 से शुरु किया। एक दिन में एक हजार लीटर पेंट बनाया जा रहा है। एक लीटर बेचने से 30 रुपये की इनकम होती है। अब तक 11 हजार लीटर पेंट बेचा जा चुका है। जिससे स्वंय सहायता समूह को 3.30 लाख रुपये का मुनाफा हुआ है।
मुनाफे के पैसे से खरीदी डेढ़ लाख की कलर मशीन
उसी मुनाफे के पैसे से स्वंय सहायता समूह ने बीते मई महीने में डेढ़ लाख रुपये की एक कलर मशीन खरीदी है। मशीन इंस्टाल करने के लिए इंजीनियर को भी 15 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। उनके स्वंय सहायता समूह में कुल 11 महिलाए हैं, जो गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम कर रही हैं। महिलाओं को डेली बेसिस पर पेमेंट भी दिया जा रहा है।
डीएम ने जताया भरोसा तो खुश हुईं साक्षी
साक्षी सिन्हा ने स्वंय सहायता समूह में जुड़ने के बाद काम सीखा और अब तक दो जगह पर लोगों को ट्रेनिंग भी दे चुकी हैं। साक्षी कहती हैं कि पहले हम लोग हाउस वाइफ थे। फैमिली पर डिपेंडेड थे। अब हम लोग आत्मनिर्भर हो गए हैं। काम कर रहे हैं तो कुछ पैसा घर पर भी लगा रहे हैं। साक्षी कहती हैं कि काम के दौरान उनके लिए प्राउड का मोमेंट तब आया। जब बालोद जिले के डीएम ने उनका उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि यदि साक्षी है तो पेंट हाउस चलेगा। उस क्षण उन्हें गर्व महसूस हुआ।
...इसलिए है मार्केट में डिमांड
मार्केट में मिलने वाले पेंट में पाए जाने वाले पदार्थ हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि गोबर से निर्मित पेंट को प्राकृतिक पदार्थों की मदद से बनाया जाता है। यह घर की दीवारों को गर्म होने से बचाता है और बाजार में मिलने वाले पेंट से सस्ता भी है। एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों की वजह से भी प्राकृतिक पेंट की डिमांड है।
कैसे बनता है गोबर से पेंट?
गोबर से पेंट बनाने के लिए पहले इसे मशीन में पानी के साथ मिक्स किया जाता है। फिर तैयार घोल से गोबर में पाए जाने वाले फाइबर और लिक्विड को अलग किया जाता है और उस लिक्विड को 100 डिग्री सेल्सियस पर गरम किया जाता है। जिससे उसका अर्क तैयार होता है। उसी अर्क को पेंट के बेस के रूप में प्रयोग किया जाता है। फिर इससे पेंट तैयार किया जाता है।
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