
नयी दिल्ली। जेरोधा (Zerodha) के को फाउंडर निखिल कामथ (Nikhil Kamath) भारत के युवा अरबपतियों में शामिल हैं। हाल के महीनों में फोर्ब्स द्वारा जारी अमीर लोगों की लिस्ट में 44वें नंबर पर थे। कभी 8000 रुपये की सैलरी पर काम करते थे। स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग शुरू की और फिर धीरे-धीरे नये नये वेंचर खड़ा करना शुरू कर दिया। अब 28000 करोड़ रुपये के साम्राज्य के मालिक हैं। अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा दान करने वाले दानवीरों की लिस्ट में भी शुमार हैं। हाल ही में पॉडकास्ट 'डब्ल्यूटीएफ' पर अपने जीवन से जुड़े दिलचस्प सवालों के जवाब दिए हैं। आइए जानते हैं निखिल कामथ की सक्सेस स्टोरी और लाइफ फिलॉसफी।
निखिल कामत सक्सेस स्टोरी
5 सितम्बर 1987 को जन्मे निखिल कामथ शुरूआती दिनों में पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे। 17 साल की उम्र में काम करने पर ध्यान दिया। कॉल सेंटर में 8000 रुपये सैलरी पर नौकरी शुरू कर दी। नौकरी के साथ स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग भी शुरू करने लगे। जब मुनाफा होना शुरू हुआ तो स्टॉक मार्केट के काम पर फोकस बढ़ाया। साल 2010 में अपने भाई नितिन कामथ के साथ मिलकर जेरोधा की नींव रखी। साथ ही Gruhas, हेज फंड, True Beacon की भी शुरूआत कर दी। फिनटेक इनक्यूबेटर रेनमैटर और रेनमैटर फाउंडेशन का भी संचालन करने लगे। फोर्ब्स के जारी आंकड़ों के मुताबिक, निखिल और नितिन कामथ की नेटवर्थ करीबन 28 हजार करोड़ रुपये है। वह अपनी अधिकांश कमाई दान करने के फैसले को लेकर भी चर्चा में रहें।
निखिल कामत लाइफ फिलॉसफी
हाल ही में जीरोधा को-फाउंडर निखिल कामत ने परिवार और विरासत को लेकर पॉडकास्ट 'डब्ल्यूटीएफ' में अहम बात रखी। उनका कहना है कि पिता बनने में उनकी दिलचस्पी नहीं है। वह इसलिए बच्चों को संभालने में 20 साल नहीं बिताना चाहते कि बच्चे बड़े होकर उनकी केयरिंग करेंगे। उनका कहना है कि यदि 18-20 साल बाद किस्मत साथ देता है तो बच्चा मेरी केयरिंग करेगा। यह भी संभव है कि बच्चे को यह सब ठीक न लगे और वह उसे छोड़ने का निर्णय ले। विरासत की सोच पर भरोसा न जताते हुए उन्होंने कहा कि...आप भी किसी दूसरे प्राणी की तरह एक दिन मरते हैं। उसके बाद कोई आपको याद नहीं करता।
कमाई का 25 फीसदी करते हैं डोनेट
आपको बता दें कि निखिल कामथ अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दान देने में विश्वास करते हैं। साल 2022 में निखिल और नितिन कामथ ने 100 करोड़ रुपये डोनेट किए थे। वह Young India Philanthropic Pledge लिस्ट में भी शामिल हैं। इस ग्रुप में शामिल होने वाले लोग अपनी कमाई का 25 फीसदी डोनेट करते हैं।
कहा-मौत के बाद याद किए जाने का मतलब नहीं
कामथ मौत के बाद याद किए जाने की जरूरत पर सवाल खड़े करते हुए कहते हैं कि मौत के बाद याद करने के लिए बच्चे होने का मतलब समझ नहीं आता। उनका मानना है कि इंसान को अपना जीवन अच्छी तरह गुजारना चाहिए, जो भी लोग मिलें, उनके साथ अच्छा बिहैव करना चाहिए।
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