
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहली बार महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव के दौरान कभी भी 50-50 के फार्मूले पर बात नहीं हुई और न ही गठबंधन के दौरान। लिहाजा शिवसेना की मांग गलत है। उन्होंने कहा कि अगर किसी दल के पास सरकार बनाने के लिए बहुमत है तो वह राज्यपाल के पास जा सकता है।
सार्वजनिक तौर से अमित शाह पिछले एक महीने से महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे से दूर थे। यहां तक कि पिछले दिनों बातचीत के लिए उन्हें मुंबई जाना था। लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने अपना मुंबई दौरा रद्द कर दिया। क्योंकि शिवसेना के रूख में कोई नरमी नहीं दिख रही थी। लिहाजा वह बातचीत के लिए मुंबई नहीं गए। जबकि अमित शाह को विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेना था और महाराष्ट्र में सरकार के लिए शिवसेना से बातचीत करनी थी। इसके बाद अमित शाह ने पूरी जिम्मेदारी सरकार बनाने की राज्य नेतृत्व को दे दी थी।
लेकिन आज पहली बार महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीति पर अमित शाह ने चुप्पी तोड़ते हुए राज्य में सरकार न बनने के लिए शिवसेना को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने साफ किया कि जिस फार्मूले को लेकर शिवसेना अड़ी हुई थी। उस पर कभी बातचीत नहीं हुई और न ही चुनाव के दौरान शिवसेना ने देवेन्द्र फडणनीस के सीएम के मुद्दे पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने कई बार इस बात का जिक्र किया कि राज्य में सरकार देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व में ही बनेगी।
एक टीवी न्यूज चैनल को दिए गए अपने साक्षात्कार में भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान मैने और पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि अगर हमारा गठबंधन जीतता है तो देवेंद्र फडणवीस सीएम होंगे। शाह ने कहा कि राज्य में चुनाव परिणाम 24 अक्टूबर को आ गए थे और इसके बावजूद किसी भी दल ने 18 दिन तक सरकार बनाने का दावा नहीं किया। सबी दलों को समान समय दिया गया और जिसके बाद बहुमत है वह राज्यपाल के पास जाकर सरकार बनाने का दावा कर सकता है।
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