पूरे 32 दिनों बाद कैसे खुला बालाकोट पर भारतीय एयरस्ट्राइक का राज, जानिए पांच बिंदुओं में

Published : Mar 30, 2019, 01:05 PM ISTUpdated : Mar 30, 2019, 01:17 PM IST
पूरे 32 दिनों बाद कैसे खुला बालाकोट पर भारतीय एयरस्ट्राइक का राज, जानिए पांच बिंदुओं में

सार

भारत के एयरस्ट्राइक के बाद अपनी शर्मिंदगी छिपाने के लिए पाकिस्तान ने आखिरकार बालाकोट को पत्रकारों के लिए खोल ही दिया। हालांकि पाक सेना ने पिछले 32 दिनों में भारतीय वायुसेना के कहर के निशानों को ढंकने की पुरजोर कोशिश की है। लेकिन सच छुपाए नहीं छुप रहा है। 

बालाकोट: एयरस्ट्राइक के पूरे 32 दिनों बाद पाकिस्तानी फौज हेलीकॉप्टर से आठ मीडिया समूह के पत्रकारों को लेकर बालाकोट पहुंची। उसका मकसद वहां हुए भारतीय वायुसेना के हमलों को झुठलाना था। 


लेकिन सच तो सच है, वह छुपाए नहीं छुपता। 28 मार्च को जब पाकिस्तानी फौज अपने सर्विस हेलीकॉप्टर से पत्रकारों को लेकर वहां पहुंची तो पाया गया कि अभी भी कई सारे ऐसे इलाके हैं जिसे पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स यानी वहां के अर्द्धसैनिक जवानों की टुकड़ी ने घेर रखा है। जहां तक जाने की इजाजत किसी को नहीं है। 
पत्रकारों के सामने पाकिस्तान सेना के अधिकारी कुछ इस तरह का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे, जैसे यहां सब कुछ सामान्य है। साफ तौर पर यह वहां हुए भारतीय एयरस्ट्राइक को झुठलाने की कोशिश थी।


खास बात यह रही कि अपने प्रोपगैंडा के लिए पाकिस्तानी फौज ने बच्चों को ढाल बनाया। उन्होंने वहां के एक मदरसे में तीन सौ बच्चे विशेष तौर पर रखवाए। जिनसे पत्रकारों की मुलाकात कराई गई और वीडियो भी बनवाया गया। लेकिन बच्चे तो  बच्चे ही होते हैं। भले ही पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने बहुत अच्छी तरह जवाब समझा दिया था। 28 मार्च को आठ मीडिया टीम के सदस्यों को बालाकोट कैंप के अंदर ले जाने से पहले 300 के करीब बच्चों को कैंप में बैठा दिया गया था। सभी बच्चों को पहले ही यह समझाया गया था कि उन्हें मीडिया के सामने क्या जवाब देना है।
लेकिन पत्रकारों ने जब वीडियो बनाना शुरु किया तो इस बात की कलई खुल गई कि इन बच्चों को संभावित प्रश्नों के जवाब रटाए गए हैं। 


इसके अलावा पाकिस्तानी सेना की कलई इस बात से भी खुल गई कि उसे पत्रकारों का वहां का दौरा कराने में पूरे 32 दिन लग गए। दरअसल यह सवाल सबके मन में है कि जैसा पाकिस्तानी फौज दावा कर रही है कि बालाकोट में सब कुछ सामान्य है और यहां भारत के एयर स्ट्राइक जैसा कुछ हुआ ही नहीं है। तो फिर यहां पत्रकारों का दौरा कराने में पूरे 32 दिन क्यों लग गए। 
यह सवाल इसलिए भी उठता है क्योंकि पहले समाचार एजेन्सी रॉयटर के पत्रकारों ने बालाकोट जाने की कोशिश की थी। उन्होंने बालाकोट पर भारतीय एयरस्ट्राइक के आठ दिनों बाद बालाकोट जाने की कोशिश की थी। लेकिन तब उन्हें बालाकोट जाने से रोक दिया गया था। अगर पाकिस्तान का दावा सही है तो पत्रकारों को तत्काल क्यों नहीं बालाकोट ले जाया गया। 


इन पत्रकारों ने जब बालाकोट का दौरा किया तो पाया कि वहां बहुत से ऐसे लोग भी सेना की वर्दी में दिख रहे हैं जो कि वास्तव में सैनिक नहीं हैं। 
इस बारे में विशेष तफ्तीश करने पर पता चला कि पाकिस्तानियों को लगता है कि भारत के सैटेलाइट हर समय बालाकोट के उपर निगाह बनाए रखते हैं। अगर भारतीय सेना को वहां फिर से आतंकियों के होने की खबर लगी तो वहां दोबारा हमला हो सकता है। इसलिए वहां मौजूद संदिग्ध आतंकियों को भी हर वक्त सेना की वर्दी में रहने के लिए कहा गया है। यही नहीं पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेन्सी आईएसआई ने अपने यहां मौजूद सभी आतंकी गुटों के लिए आदेश जारी किया है कि वह अपने ट्रेनिंग कैंपों से बाहर जब भी निकलें तो पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहनकर निकलें। जिससे भारत को यह लगे कि वह सभी पाकिस्तानी फौज के ही जवान हैं। इससे वह भारतीय सेना के कहर से बचे रहेंगे।  
बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने इस 16 मार्च को आतंकी सरगनाओं के साथ बैठक करके उन्हें यह निर्देश दिया है। 16 मार्च को निकयाल इलाके में आतंकियों और पाकिस्तानी सेना के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें आइएसआइ, पाकिस्तानी सेना के तीन, गुलाम कश्मीर ब्रिगेड के दो बड़े अधिकारियों सहित लश्कर आतंकी शामिल थे। 


खास बात यह है कि पुलवामा हमले के बाद जब भारतीय वायुसेना के मिराज विमानों ने 26 फरवरी को सुबह 3:30 बजे तड़के खैबरपख्तुनवा के बालाकोट में जैश के आतंकी कैंप को तबाह किया था। पाकिस्तान इसी बात को झुठलाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन वह भूल जाता है कि भारतीय एयरस्ट्राइक की सबसे पहली खबर खुद उसके डीजीएमओ ने ही ट्विट करके सबसे पहले दुनिया को दी थी। 


 

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