
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कड़े फैसले लेने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार का अगला पड़ाव प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हो सकता है। ईडी में बड़े बदलावों की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, 27 अक्टूबर को रिटायर होने जा रहे ईडी के प्रमुख करनैल सिंह को सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। पहले माना जा रहा था कि सरकार उनका सेवाकाल कुछ समय के लिए बढ़ा सकती है। सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि सरकार ईडी के नए प्रमुख के नामों पर विचार कर रही है। हालांकि मंगलवार तक किसी नाम को फाइनल नहीं किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह भी छुट्टी पर हैं। राजेश्वर सिंह ने वित्त सचिव हंसमुख अढिया के खिलाफ आरोप लगाए थे। करनैल सिंह ने इस शिकायत को राजस्व सचिव को भेज दिया था।
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राजेश्वर सिंह ने अढिया द्वारा प्रमोशन नहीं दिए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने 20 साल के अप्रैजल रिकॉर्ड के हवाले से पूछा था, 'क्या आप उन लोगों की राय नहीं मानते हैं, जिन्होंने मुझे 'आउटस्टैंडिंग' स्कोर दिया था? क्या मेरे लिए यह संभव है कि मैं एक समय पर सभी को मैनेज कर पाऊं।'
करनैल सिंह 1984 बैच के यूटी (यूनियन टेरेटरी) कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। अगस्त 2015 में सरकार ने रंजन एस. कटोच के कार्यकाल को घटाकर उन्हें ईडी का अतिरिक्त प्रभार दिया था। अक्टूबर 2016 में सरकार ने उन्हें दो साल के लिए ईडी का प्रमुख बना दिया था। उनका पूरा कार्यकाल कभी विवादों में नहीं घिरा। वह उन चुनिंदा आईपीएस अधिकारियों में से हैं जिन्होंने ज्यादातर समय आईएएस अफसरों को दिए जाने वाली जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसी संभावना है कि 1985 बैच के अधिकारी जीसी मुर्मू को प्रवर्तन निदेशालय का अगला प्रमुख बनाया जा सकता है।
इस बात की संभावना है कि ईडी के नए प्रमुख के प्रभार संभालते ही करीब छह लोगों का तबादला हो सकता है।
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