पवार के बाद अब उनके करीबी प्रफुल्ल पटेल की बढ़ी मुश्किलें, दाऊद के करीबी से ली संपत्ति

Published : Oct 16, 2019, 08:34 AM IST
पवार के बाद अब उनके करीबी प्रफुल्ल पटेल की बढ़ी मुश्किलें, दाऊद के करीबी से ली संपत्ति

सार

असल में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रफुल्ल पटेल ने दाऊद इब्राहिम के करीबी इकबाल मिर्ची से सीजे हाउस में संपत्ति खरीदी थी। हालांकि पटेल का दावा है कि जो भी संपत्ति खरीदी गई वह कानूनी तौर पर खरीद गई और उनका मिर्ची से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं है।

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के बाद एनसीपी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पटेल को  समन भेजा है। इसके लिए ईडी ने उन्हें 18 अक्टूबर को ईडी के कार्यालय में पेश होने का आदेश दिया है। ईडी पटेल से सीजे हाऊस की परिसंपत्तियों को लेकर पूछताछ करेगी।

असल में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रफुल्ल पटेल ने दाऊद इब्राहिम के करीबी इकबाल मिर्ची से सीजे हाउस में संपत्ति खरीदी थी। हालांकि पटेल का दावा है कि जो भी संपत्ति खरीदी गई वह कानूनी तौर पर खरीद गई और उनका मिर्ची से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं है।  पटेल ने कहा कि उन पर लगे आरोपों बेबुनियाद हैं और ये महज अटकलें है। उन्होंने कहा कि जब समय आएगा वह इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया में क्या चल रहा है। इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

दारूद के करीबी इकबाल मिर्ची से संबंधों के सवाल पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सही समय आने पर इस पर अपना जवाब देंगे। पटेल का कहना है कि सीजे हाउस की संपत्ति उनके परिवार ने 1963 में ग्वालियर के महाराजा से खरीदी थी। लेकिन इस पर कई लोगों का विवाद था जिसके कारण ये संपत्ति 1978-2005 से अदालत के रिसीवर में थी। गौरतलब है कि इकबाल मिर्ची की 2013 में मौत हो गई थी। मीडिया में जो खबरें चल रही हैं। उसके मुताबिक ईडी के पास इस बात के सबूत हैं कि 2007 में इकबाल मिर्ची और प्रफुल्ल पटेल के बीच इस संपत्ति को लेकर समझौते के दस्तावेज हैं।

इसी आधार पर पटेल को समन दिया गया है। क्योंकि इस दस्तावेज पर प्रफुल्ल पटेल ने साझेदार की हैसियत से हस्ताक्षर किए थे। गौरतबल है कि पिछले दिनों ही ईडी ने शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार को भी नोटिस दिया। अजित पवार पर महाराष्ट्र में हुए सहकारी घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ये आरोप उस वक्त के हैं जब वह राज्य के उपमुख्यमंत्री थे।

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