अलीगढ़ मासूम हत्याकांड: हत्यारोपियों को नहीं मिलेगी कानूनी सहायता, बार असोसिएशन ने किया ऐलान

By Team MyNationFirst Published Jun 8, 2019, 2:53 PM IST
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अलीगढ़ में ढाई साल की मासूम बच्ची के हत्यारोपियों के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब उनके साथ वहां के वकील भी शामिल हो गए हैं। 

अलीगढ़: मात्र ढाई साल की मासूम बच्ची की नृशंस हत्या के खिलाफ पूरे देश में उबाल है। उसकी हत्या के आरोप में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम हैं जाहिद, असलम, मेंहदी हसन(मुख्य आरोपी जाहिद का भाई) और जाहिद की पत्नी। 

लोगों में इन आरोपियों को लेकर बहुत ज्यादा गुस्सा है। खुद अलीगढ़ की बार एसोसिएशन ने भी अपने गुस्से का इजहार करते हुए कहा है कि 'हम बच्ची के परिवार के साथ खड़े हैं और वकील आरोपियों का केस नहीं लड़ेंगे'।

यह ऐलान अलीगढ़ बार एसोसिएशन के महासचिव अनूप कौशिक ने किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी बाहर के वकील को मुकदमा लड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हम बच्ची के लिए न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।

Anoop Kaushik,General Secretary, Aligarh Bar Association: We stand with the family of 2.5-year-old girl who was murdered in Tappal & no advocate will appear in Court for the accused. Advocate from outside will not be allowed to fight the case. We will fight for the child. pic.twitter.com/cwuiaQvwbz

— ANI UP (@ANINewsUP)

इस मामले में जाहिद और असलम को पहले गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद दो और गिरफ्तारियां शनिवार की शाम को की गई। 

अभी तक मिली खबरों के मुताबिक इस बच्ची की हत्या पैसों के लेन देने की वजह से हुई थी। हत्यारोपी जाहिद ने बच्ची के पिता से पैसे लिए थे। जिसे वह वापस मांग रहे थे। जिससे नाराज होकर उसने बच्ची का अपहरण कर लिया और उसकी बेहद बेरहमी से हत्या कर दी। 

इस हत्या में आरोपियों ने इतनी बर्बरता दिखाई कि लोगों के दिल दहल गए। अलीगढ़ के वकीलों ने भी इसी वजह से आरोपियों को किसी तरह की कानूनी सहायता नहीं प्रदान करने का ऐलान किया है। जिससे इन सभी को जल्दी से जल्दी सजा दिलाई जा सके। 

 

 

सरकार अब इस मामले में जल्दी से जल्दी कार्रवाई पूरी करके आरोपियों को सजा दिलाना चाहती है। मामले की तेजी से जांच के लिए यूपी पुलिस ने एक टीम गठित की है। जिसमें फोरेंसिक साइंस टीम, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और एक्सपर्ट्स की एक टीम भी होगी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट और रासुका के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। 

इससे पहले लापरवाही के आरोप में पांच पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। इन सभी पर देरी से गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखने के अलावा, बच्ची की खोज और हत्या के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी में लापरवाही बरतने का आरोप है।

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