रोज वैली घोटाला: ईडी के निशाने पर मशहूर बांग्ला अभिनेता प्रोसेनजीत

Published : Jul 10, 2019, 10:54 AM IST
रोज वैली घोटाला: ईडी के निशाने पर मशहूर बांग्ला अभिनेता प्रोसेनजीत

सार

एक फिल्म का प्रोडक्शन चिटफंड कंपनी हैंगओवर ने किया। इस फिल्म में प्रोसेनजीत हीरो थे। पूरी फिल्म की लागत 5 लाख रुपए से कम थी। ईडी का कहना है कि, कागजों में रोज वैली ने प्रोडक्शन की लागत को कम दिखाया और निवेशकों से अधिक रुपए मांगे।

नई दिल्ली. रोजी वैली घोटाले मामले में ईडी ने एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी को नोटिस भेजा है। ईडी ने उन्हें 19 जुलाई को पेश होने को कहा है। ईडी का कहना है कि, रोज वैली ग्रुप पर दो अलग-अलग स्कीम का लालच देकर लोगों से पैसा हड़पने का आरोप है।

प्रोसेनजीत मशहूर बंगाली एक्टर हैं। रोज वैली ग्रुप ने साल 2010- 12 के बीच कई बंगाली फिल्मों के प्रोडक्शन में पैसा लगाया था। एक फिल्म का प्रोडक्शन चिटफंड कंपनी हैंगओवर ने किया। इस फिल्म में प्रोसेनजीत हीरो थे। पूरी फिल्म की लागत 5 लाख रुपए से कम थी। ईडी का कहना है कि, कागजों में रोज वैली ने प्रोडक्शन की लागत को कम दिखाया और निवेशकों से अधिक रुपए मांगे।

इससे पहले सीबीआई ने साल की शुरूआत में बंगाली फिल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत मोहता को अरेस्ट किया था। उनपर पर भी कथित तौर पर रोज वैली से 25 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। बता दें, जांच एजेंसियां रोज वैली कंपनी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही हैं। पोंजी स्कीम के तहत इसमें पैसे लगाए हैं और कई अलग अलग कंपनियां बनाकर लोन पास कराए गए।

इससे पहले 2 जुलाई को सीबीआई ने करोड़ों रुपए के शारदा चिटफंड घोटाले में बंगाली कलाकार शुभप्रसन्ना और बिजनेसमैन शिवाजी पांजा को नोटिस दिया था। वहीं पांजा को रोज वैली के मामले में 9 जुलाई को बुलाया गया। दोनों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का करीबी माना जाता है।

क्या है रोज वैली चिटफंड घोटाला
ईडी का कहना है कि रोज वैली घोटाला, शारदा पोंजी घोटाला से बड़ा घोटाला है। रोज वैली ग्रुप ने दो अलग-अलग स्कीम का लालच देकर आम लोगों के रुपए हड़पे हैं।  हॉलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का झांसा देकर रोजवैली ने 1 लाख निवेशकों के 15 हजार करोड़ रुपए हड़पे हैं। इस घोटाले का मास्टरमाइंड रोजवैली ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर शिवमय दत्ता को बताया जाता है। घोटाले के तार बॉलीबुड और रियल स्टेट के कारोबारियों से जुड़े हैं। 

टीएमसी सांसद की हो चुकी है गिरफ्तारी
सीबीआई ने इस केस में दिसंबर 2016 को टीएमसी सांसद तापस पॉल को अरेस्ट किया था। इसी केस में  जनवरी 2017 को टीएमसी के ही दूसरे सांसद बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी हुई थी। साथ ही तत्कालीन टीएमसी सांसद मुकुल रॉय का नाम भी इस घोटाले में सामने आया था। 
 

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