जन्मदिन विशेष: भारतीय राजनीति के सच्चे जननायक जयप्रकाश नारायण

dhananjay Rai |  
Published : Oct 11, 2018, 05:23 PM IST
जन्मदिन विशेष: भारतीय राजनीति के सच्चे जननायक जयप्रकाश नारायण

सार

जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और राजनेता थे। 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व किया था। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी पहली भाजपा की सरकार में उन्हे भारत सरकार ने उन्हें सन 1998 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा।

स्वतंत्रता सेनानी और सम्पूर्ण क्रांति के जनक ‘लोक नायक’ के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण का आज जन्म दिन है। जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और राजनेता थे। 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व किया था।

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी पहली भाजपा की सरकार में उन्हे भारत सरकार ने उन्हें सन 1998 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा। जेपी ने 1957 में राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया पर लेकिन बाद वह फिर से राजनीति में सक्रिय हो गए।

उन्होंने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की तानाशाही रवैये के खिलाफ गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने 1977 में विपक्ष को एकजुट कर इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया।

जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के छपरा जिले के सिताब-दियारा गांव में हुआ। 

उनके पिता का नाम हर्सुल दयाल श्रीवास्तव और माता का नाम फूल रानी देवी था। वो अपनी माता-पिता की चौथी संतान थे। 

मौलाना अबुल कलाम आजाद के भाषण से प्रभावित होकर उन्होंने पटना कॉलेज छोड़कर ‘बिहार विद्यापीठ’ में दाखिला ले लिया। बिहार विद्यापीठ में पढाई के पश्चात सन 1922 में जयप्रकाश नारायण जब 1929 में अमेरिका से लौटे तब स्वतंत्रता संग्राम तेज़ी पर था। धीरे-धीरे उनका संपर्क जवाहर लाल नेहरु और महात्मा गाधी से हुआ और वो स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। 

1932 मे सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान जब गांधी, नेहरु समेत अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी जेल चले गए तब उन्होने भारत के अलग-अलग हिस्सों मे आन्दोलन को दिशा दी।

ब्रिटिश सरकार ने अन्ततः उन्हें भी मद्रास में सितंबर 1932 मे गिरफ्तार कर लिया गया और नासिक जेल भेज दिया। नासिक जेल में उनकी मुलाकात अच्युत पटवर्धन, एम. आर. मासानी, अशोक मेहता, एम. एच. दांतवाला, और सी. के. नारायणस्वामी जैसे नेताओं से हुई। 

इन नेताओं के विचारों ने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (सी.एस.पी) की नींव रखी। जब कांग्रेस ने 1934 मे चुनाव मे हिस्सा लेने का फैसला किया तब कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी ने इसका विरोध किया।

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया और ऐसे अभियान चलाये जिससे सरकार को मिलने वाला राजस्व रोका जा सके। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गई। 

उन्होने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच मतभेदों को सुलझाने का प्रयास भी किया। सन 1942 में ‘भारत छोडो’ आंदोलन के दौरान वे हजारीबाग जेल से फरार हो गए थे।

आजादी के बाद देश में महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी व्याप्त थी ऐसे समय में जय प्रकाश नारायण ने आगे आकर युवाओं के माध्यम से जनता को एकत्रित किया। 

उन्होंने कहा ये सारी समस्याएं तभी दूर हो सकती हैं, ‘जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति-’सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।”  उनके अहिंसावादी आंदोलन की सूरत को देखकर कुछ लोगों ने उन्हें आजाद भारत के गांधी की उपाधि दी थी।

जे.पी. शुरु में कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते थे लेकिन आजादी के बाद इंदिरा गांधी के समय में भ्रष्ट व तानाशाही रवैये के काऱण उन्हें कांग्रेस और इंदिरा के विरोध में खड़ा होना पड़ा। 

सन 1975 में अदालत में इंदिरा गांधी पर चुनावों में भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो गया और जयप्रकाश ने विपक्ष को एकजुट कर उनके इस्तीफे की मांग की। इसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर दिया और जे.पी. समेत हजारों विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया।

जनवरी 1977 को इंदिरा गाँधी सरकार ने आपातकाल हटाने का फैसला किया। मार्च 1977 में चुनाव हुए और लोकनायक के “संपूर्ण क्रांति आदोलन” के चलते भारत में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी।

आपातकाल में जेल में बंद रहने के दौरान उनकी तबियत अचानक 24 अक्टूबर 1976 को ख़राब हो गई और 12 नवम्बर 1976 को उन्हें रिहा कर दिया गया।  जयप्रकाश नारायण का निधन 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में मधुमेह और ह्रदय रोग के कारण हो गया।
 

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