उन्नाव गैंगरेप के आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप की बदली जा सकती है जेल, कई मोबाइल जांच के घेरे में

Published : Jul 30, 2019, 11:12 AM IST
उन्नाव गैंगरेप के आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप की बदली जा सकती है जेल, कई मोबाइल जांच के घेरे में

सार

सीतापुर जेल में बंद भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जेल बदली जा सकती है। उन्हें इलाहाबाद या फिर अन्य जेल में शिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस कुछ सदिंग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जो उस दिन सीतापुर जेल के आसपास सक्रिय थे।

लखनऊ। उन्नाव गैंगरेप पीड़िता का रायबरेली जिले में जबरदस्त एक्सीडेंट होने और इसमें साजिश होने की आशंका को देखते हुए सीतापुर जेल में बंद भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जेल बदली जा सकती है। उन्हें इलाहाबाद या फिर अन्य जेल में शिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस कुछ सदिंग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जो उस दिन सीतापुर जेल के आसपास सक्रिय थे।

उन्नाव के बांगरमऊ से भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर गैंगरेप के मामले में पिछले  एक साल से सीतापुर जेल में बंद हैं। तीन दिन पहले ही रायबरेली के गुरूबक्शगंज के पास गैंगरेप पीड़िता की संदिग्ध हालत में एक्सीडेंट हो गया। इसका आरोप अब भाजपा विधायक पर लगा है।

इस एक्सीडेंट में पीड़िता की चाची और मौसी की मौके पर ही मौत हो गयी है जबकि वह और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हैं और लखनऊ के ट्रामा सेंटर में उनका इलाज चल रहा है। पीड़िता अपने चाचा से रायबरेली की जिला जेल में मिलने जा रही थी तभी शाम को एक्सीडेंट हो गया।

हालांकि पुलिस अभी हादसा और साजिश दोनों पहलूओं पर जांच कर रही है। लेकिन पीड़िता के परिजनों ने सीधे तौर पर कुलदीप सिंह पर आरोप लगाया है। कुलदीप प्रदेश के दबंग विधायकों में माने जाते हैं।

अब शासन ने कुलदीप सिंह को सीतापुर जेल से अन्य जेल में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक सेंगर को सीतापुर जेल से नैनी सेंट्रल जेल इलाहाबाद स्थानांतरित किया जा सकता है।

हालांकि पुलिस शनिवार को सीतापुर जेल के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। क्योंकि पुलिस को शक है कि उन दौरान वहां पर कई नंबर सक्रिय थे। फिलहाल सर्विलॉस के जरिए ये पता लगा रही है कि कितने नंबर सक्रिय थे और उन नंबरों से किससे बात की गयी।

पिछले दिनों कुलदीप सिंह सेंगर से मिलने वाले कुछ लोगों का वीडियो वायरल हुआ था। हालांकि भाजपा विधायक का मामला होने के कारण प्रशासन भी शांत रहा। असल में प्रदेश की जेलों में कैदी आसानी से मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं और इससे पहले भी कई जेलों में दबिश के दौरान मोबाइल और हथियार भी मिल हैं। यही नहीं जेलों में बाहर से खाना ले जाना या फिर अन्य सुविधाओं का मुहैया कराना आम बात है।
 

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