
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं किया जाएगा। पार्टी किसी ओर को भी पीएम पद का चेहरा नहीं बनाएगी। इस पर फैसला चुनाव के बाद लिया जाएगा। पूर्व वित्त मंत्री ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में यह बात कही है।
चिदंबरम ने स्वीकार किया कि पिछले दो दशकों में क्षेत्रीय दलों का तेजी से उभार हुआ है। मजबूत पकड़ के चलते उन्होंने अपने-अपने राज्यों में राष्ट्रीय पार्टियों को मजबूत चुनौती दी। भाजपा और कांग्रेस का कुल वोट भी क्षेत्रीय दलों के गढ़ में 50 फीसदी से कम है। चिंदबरम से आरोप लगाया कि मोदी सरकार क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस से हाथ मिलाने के लिए रोकने की खातिर 'धमकाने वाली रणनीति' अपना रही है। ये परिस्थितियां तब बदल सकती हैं जब सरकार महज केयरटेकर तक सीमित हो जाए और हम राज्यों के सात एक गठबंधन बना लें।
चिदंबरम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है। अभी तक क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कांग्रेस की कोशिशों को सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। लेकिन पार्टी का मानना है कि वह क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने के लिए थोड़ा बहुत 'समझौता' कर सकती है।
इससे पहले, कांग्रेस के एक और बड़े नेता सलमान खुर्शीद ने भी कहा था कि पार्टी का अपने दम पर सत्ता में वापसी करना मुश्किल है। 2019 में भाजपा को हराने के लिए सभी दलों को साथ आना होगा। कांग्रेस गठबंधन के लिए प्रतिबद्ध है और हर कदम उठाने को तैयार है। कांग्रेस एक ऐसा दल है, जिसे हर राज्य में सीट मिलती है।
उन्होंने कहा था, 'हमारे सभी नेताओं ने साफ कर दिया है कि देश की सरकार को बदलने के लिए गठबंधन की जरूरत है। ऐसे में गठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए चाहे जिस त्याग, तालमेल और बातचीत की जरूरत हो, कांग्रेस वह करने के लिए तैयार है।'
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