आतंकियों से लड़ने और सीमापार ऑपरेशन के लिए 'स्पेशल 1200'

Ajit K Dubey |  
Published : Oct 22, 2018, 09:42 AM IST
आतंकियों से लड़ने और सीमापार  ऑपरेशन के लिए 'स्पेशल 1200'

सार

भारतीय सेना के पास स्पेशल फोर्स का सबसे बड़ा पूल है। सेना के पास इसकी करीब 10 बटालियन हैं। इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात किया गया है। ये विशेष बल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियान और पूर्वोत्तर के राज्यों में अभियानों को अंजाम देते हैं। 

तीनों सेनाओं के 1200 बेहतरीन कमांडो के साथ स्पेशल फोर्सेस डिवीजन शुरू होने जा रहा है। हाल ही में इसके गठन को सरकार की मंजूरी मिली है। इसमें सेना, नौसेना और वायुसेना के सबसे मारक कमांडो शामिल होंगे, जो आतंकवाद रोधी और सीमापार ऑपरेशन को अंजाम देंगे। 

हाल ही में हुई कमांडर कांफ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साइबर, स्पेस और स्पेशल फोर्सेस के अभियानों के लिए तीन नई एजेंसियों के गठन को मंजूरी देने की घोषणा की गई थी। इस तरह की एजेंसियों के गठन की मांग यूपीए सरकार के समय में की गई थी लेकिन तब इसकी मंजूरी नहीं मिली।

सरकार के सूत्रों ने 'माय नेशन' को बताया, 'स्पेशल फोर्सेस की इस डिवीजन का नेतृत्व मेजर जनरल रैंक के अधिकारी को मिलेगा। इसमें भारतीय सेना के पैरा (स्पेशल फोर्स यानी एसएफ) की दो बटालियनों के साथ वायुसेना के गरूड़ कमांडो की एक यूनिट और नौसेना के मरीन कमांडो (मार्कोस) की एक यूनिट  शामिल होगी।'

भारतीय सेना के पास स्पेशल फोर्स का सबसे बड़ा पूल है। सेना के पास इसकी करीब 10 बटालियन हैं। इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात किया गया है। ये विशेष बल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियान और पूर्वोत्तर के राज्यों में अभियानों को अंजाम देते हैं। 

सेना की इन बटालियनों को स्पेशल फोर्सेस डिवीजन के रोटेशन के तहत जोड़ा जाएगा। ये स्पेशल फोर्स तीनों सेना मुख्यालयों के आदेश पर ऑपरेशन को अंजाम देगी। 

यह भी पढ़ें - तीनों सेनाओं की ताकत बढ़ाने को पीएम मोदी ने किया ये बड़ा ऐलान

स्पेशल फोर्सेस डिवीजन का मुख्यालय राजधानी दिल्ली से  बाहर बनाया जाएगा। इसका संचालन में स्पेशल फोर्सेस के ऐसे जवानों और अधिकारियों को भी लगाया जाएगा जो ऑपरेशन अथवा प्रशिक्षण के दौरान चोटिल हो गए थे। 

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'तीनों सेनाओं में ऐसे बहुत से अधिकारी और जवान हैं, जो अभियानों के दौरान घायल हुए हैं। ये लोग जमीन पर काम करने वाले जवानों को बेहतर मदद कर सकते हैं। उनके अनुभव का स्पेशल अभियानों को अंजाम देने में बेहतर इस्तेमाल होगा।'

स्पेशल फोर्स के अलावा बनाई जाने वाली स्पेस और साइबर डिवीजन का मुख्यालय राजधानी में ही होगा। 
 

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