यूएई ने पेश की एक और मिसालः नियम तोड़ हिंदू पिता और मुस्लिम मां की बेटी को दिया जन्म प्रमाणपत्र

Published : Apr 28, 2019, 03:15 PM IST
यूएई ने पेश की एक और मिसालः नियम तोड़ हिंदू  पिता और मुस्लिम मां की बेटी को दिया जन्म प्रमाणपत्र

सार

यूएई में प्रवासियों के लिए शादी के नियम के अनुसार, मुस्लिम पुरुष तो किसी गैर मुस्लिम महिला से शादी कर सकता है लेकिन मुसलमान महिला किसी गैर मुस्लिम व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती।  

आखिरकार नौ महीने बाद अनमता किरण को ‘अपने होने का’ दस्तावेज मिल ही गया। यूएई ने धार्मिक सहिष्णुता की एक और मिसाल पेश करते हुए एक हिंदू पिता और मुस्लिम मां की बेटी को शादी के नियमों को किनारे रख जन्म प्रमाणपत्र दे ही दिया।

खलीज टाइम्स की खबर के अनुसार, शारजाह में रहने वाले किरण बाबू और सनम साबू सिद्दीकी ने 2016 में केरल में शादी की थी। उन्हें तब परेशानी का सामना करना पड़ा जब जुलाई 2018 में उनके यहां बेटी का जन्म हुआ। लेकिन अस्पताल ने उन्हें जन्म प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। 

यूएई ने 2019 को घोषित किया है ‘सहिष्णुता’ वर्ष 

यूएई ने 2019 को ‘सहिष्णुता’ वर्ष के तौर पर घोषित किया है। इसके तहत यूएई सहिष्णु राष्ट्र की मिसाल पेश करेगा और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद की कमी को पूरा करने के प्रयास करेगा। वह ऐसा माहौल बनाएगा जहां लोग एक-दूसरे के धर्म को स्वीकार करें। 

नन्ही अनमता के पिता किरण के मुताबिक, मुझे बताया गया है कि यह पहला मामला है, जिसमें यूएई ने अपने नियमों के उलट जाकर जन्म प्रमाणपत्र जारी किया है। 

मुस्लिम महिला के गैर मुस्लिम से शादी पर है रोक

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में प्रवासियों के लिए शादी के नियम के अनुसार, मुस्लिम पुरुष तो किसी गैर मुस्लिम महिला से शादी कर सकता है लेकिन मुसलमान महिला किसी गैर मुस्लिम व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती। किरण बाबू के मुताबिक, ‘मेरे पास अबु धाबी का वीजा है। मेरा वहां बीमा हो रखा है। मैंने अपनी पत्नी को अमीरात के मेदीवर 24X7 अस्पताल में भर्ती कराया। बेटी के जन्म के बाद, मेरे हिन्दू होने की वजह से जन्म प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया गया।’

कोर्ट का दरवाजा खटखटाया पर मायूसी मिली

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद मैंने अदालत के जरिए अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। इसके लिए चार महीने तक सुनवाई चली, मगर मेरे मामले को खारिज कर दिया गया।’ बाबू ने कहा कि उनकी बेटी के पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं था तो उनकी सारी उम्मीदें माफी मिलने पर टिक गईं।

किरण बाबू के मुताबिक, वे दिन काफी तनावपूर्ण थे और माफी ही एक उम्मीद थी। भारतीय दूतावास ने मदद की। उन्होंने बताया कि न्यायिक विभाग ने उनके मामले को एक अपवाद बनाया। बाबू फिर से अदालत गए और इस बार उनके मामले को मंजूरी मिल गई। दंपति को हिंदू त्यौहार विशू से पहले 14 अप्रैल को बेटी के जन्म का प्रमाणपत्र मिल गया।

हाल ही में यूएई में रखी गई हिंदू मंदिर की नींव

यूएई की राजधानी अबू धाबी में कुछ ही दिन पहले हिंदू मंदिर की नींव रखी गई। मंदिर की आधारशिला रखने के लिए  हुए धार्मिक आयोजन में हजारों भारतीय मौजूद थे। बोचासंवासी श्री अक्षर-पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। पूजा के बाद पवित्र की गई गुलाबी ईंटों से मंदिर की नींव रखी गई। ये ईंट राजस्थान से यहां लाई गई थीं।  साल 2015 में जब पीएम मोदी यूएई की यात्रा पर गए थे तो वहां की सरकार ने हिंदू मंदिर के लिए जमीन आवंटित करने का फैसला किया था। साल 2017 में क्राउन प्रिंस ने अबू धाबी में 13.7 एकड़ जमीन को मंदिर के लिए उपहार में दी। (इनपुट पीटीआई से भी)
 

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