शिवराज की ये योजना बनेगी कमलनाथ के गले की फांस, जानें क्या है योजना

Published : Dec 24, 2018, 11:16 AM IST
शिवराज की ये योजना बनेगी कमलनाथ के गले की फांस, जानें क्या है योजना

सार

असल में भाजपा सरकार ने राज्य में आपातकाल के दौरान कैद किए गए लोगों यानी मीसाबंदियों के लिए पेंशन योजना शुरू की थी। देश में आपातकाल कांग्रेस की सरकार ने ही लगाया था और उसे पार्टी जायज ठहराती है। लिहाजा अब कांग्रेस के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ पर इस पेंशन योजना को बंद करने का दबाव है।

मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की एक योजना राज्य के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ के गले की फांस बनने जा रही है। असल में भाजपा सरकार ने राज्य में आपातकाल के दौरान कैद किए गए लोगों यानी मीसाबंदियों के लिए पेंशन योजना शुरू की थी। देश में आपातकाल कांग्रेस की सरकार ने ही लगाया था और उसे पार्टी जायज ठहराती है। लिहाजा अब कांग्रेस के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ पर इस पेंशन योजना को बंद करने का दबाव है। लेकिन नए सीएम के लिए ये इतना आसान नहीं है जबकि राज्य कांग्रेस की तरफ से इसे वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

प्रदेश के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्य में मीसाबंदियों की पेंशन को लेकर परेशान हैं। राज्य में पूर्व की भाजपा सरकार ने राज्य में मीसा बंदियों (आपातकाल में जेल की सजा काटने वाले व्यक्ति) के लिए पेंशन योजना शुरू की थी। इन लोगों को राज्य सरकार की तरफ से हर महीने 25 हजार रुपए की पेंशन मिलती है। राज्य में करीब 4 हजार मीसा बंदी हैं। इन लोगों को लोकनायक जयप्रकाश सम्मान निधि के जरिए पेंशन दी जाती है। मीसा बंदियों को पिछली भाजपा सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों वाला दर्जा दिया था, जिसकी वजह से उन्हें सरकारी आयोजनों में सम्मानपूर्वक आमंत्रित भी किया जाता है।

इसके साथ ही वह सालाना 50 हजार रपए अपने स्वास्थ्य के लिए खर्च कर सकते हैं। यही नहीं राज्य के पर्यटन निगम के होटलों में उन्हें 40 फीसदी छूट मिलती है। राज्य के पूर्व की भाजपा सरकार ने संघ के कहने पर इस पेंशन को शुरू किया था। हालांकि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी इस पेंशन के खिलाफ हैं। राज्य में कांग्रेस के ज्यादातर नेता इस पेंशन योजना को बंद करने के पक्ष में हैं। असल में केन्द्र की इंदिरा गांधी सरकार ने ही देश में आपातकाल लगाया था।

जिसे कांग्रेस के नेता जायज ठहराते हैं और ऐसे में अगर राज्य सरकार पेंशन को जारी रखती है तो ये राज्य सरकार के लिए मुश्किलें पैदा करेगा। हालांकि मीसाबंदियों के संगठन लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी का कहना है कि सम्मान निधि को बंद करना आसान नहीं है, क्योंकि इसका कानून पिछली शिवराज सरकार में विधानसभा से पारित किया गया था।

हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि अगर राज्य सरकार इसे वापस लेती भी है तो राज्यपाल से मंजूरी मिलने में उसे दिक्कत होगी। ऐसे में कांग्रेस भी ऊहापोह की स्थिति में है। हालांकि कांग्रेस की नई सरकार भाजपा के साथ में एक और मुद्दा देना नहीं चाहती है। मध्य प्रदेश ही नहीं देश के अन्य राज्यों में भी मीसा बंदियों को पेंशन दी जाती है। यूपी में यह 10 हजार रपए, झारखंड में 5 हजार रपए, राजस्थान में 22 हजार रपए और छत्तीसगढ़ में 25 हजार रुपए है। 
 

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